PoK में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग, 20 लोगों की मौत, चुनाव का लोगों ने बहिष्कार किया था

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। चुनावी धांधली के आरोपों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच कई मतदान केंद्रों पर झड़पें हुईं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थकों का आरोप है कि रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 20 लोगों की जान गई। संगठन ने सोशल मीडिया पर मृतकों के नाम भी जारी किए हैं।

दूसरी ओर, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने दावा किया कि सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के समर्थकों की फायरिंग में उसके एक कार्यकर्ता की मौत हुई और दो अन्य घायल हुए। वहीं PML-N और PPP ने एक-दूसरे पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं।

इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) कर रही है। सरकार ने 5 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन से कुछ दिन पहले ही इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद संगठन के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ नेता भूमिगत हो गए, जबकि कुछ अब भी पुंछ डिवीजन के मुख्यालय रावलाकोट में धरना स्थलों से आंदोलन चला रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है। कई जगह लगातार धरने और सड़क जाम हुए हैं।

स्थिति इतनी खराब हो गई कि बैंक लगातार दो सप्ताह तक बंद रहे। अधिकांश क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद हैं। भारत की सीमा से सटा पुंछ डिवीजन, जहां सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन हुए, कई सप्ताह तक लगभग पूरी तरह सील रहा। इससे वहां आटा और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई।

दूसरी ओर सरकार और अदालत का कहना है कि इन सीटों को केवल संविधान संशोधन के जरिए ही हटाया जा सकता है।
PoK विधानसभा में कुल 45 निर्वाचित सीटें हैं। इनमें 12 सीटें भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान आकर बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।

यही 12 सीटें पूरे विवाद की जड़ हैं। सरकार कहती है कि ये सीटें ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।

JAAC का कहना है कि जो लोग पाकिस्तान के दूसरे शहरों में रहते हैं, उन्हें PoK की सरकार बनाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

उनका कहना है कि इन 12 सीटों की वजह से स्थानीय मतदाताओं की राय का असर कम हो जाता है और अक्सर केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है।

JAAC का कहना है कि इन 12 सीटों का फायदा PML-N और PPP जैसी पार्टियां उठाती हैं।