दुनिया का वो देश, जहां बदसूरत होना है पाप!

दुनिया भर में लोग सुंदर दिखने की चाह रखते हैं. क्रीम, घरेलू नुस्खे, जिम और डाइट के जरिए कई लोग अपनी लुक सुधारने की कोशिश करते हैं. लेकिन साउथ कोरिया एक ऐसा देश है जहां खूबसूरती का मानक इतना सख्त है कि प्लास्टिक सर्जरी सामान्य बात हो गई है. यहां बदसूरत दिखना लगभग सामाजिक पाप माना जाता है.
मां-बाप खुद अपने बच्चों को सर्जरी के लिए ले जाते हैं और कई बार बार-बार करवाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक साउथ कोरिया दुनिया में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक सर्जरी की सबसे ऊंची दर वाले देशों में शुमार है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यहां हर एक हजार लोगों पर करीब 8.9 से 13.5 सर्जरी होती हैं. युवा महिलाओं में यह आंकड़ा और ज्यादा है. 19 से 29 साल की करीब 25 प्रतिशत महिलाओं ने कम से कम एक कॉस्मेटिक प्रोसीजर करवाया है.

सियोल के गंगनाम इलाके को तो प्लास्टिक सर्जरी का हब कहा जाता है जहां सैकड़ों क्लीनिक हैं. सबसे आम सर्जरी डबल आईलिड यानी आंखों में फोल्ड बनाना है. कोरियाई लोगों की आंखें आमतौर पर सिंगल लिड वाली होती हैं. डबल आईलिड से आंखें बड़ी और चमकदार दिखती हैं. नाक की सर्जरी, वी-लाइन जबड़े की शेपिंग, लिपोसक्शन और बोटॉक्स भी बहुत प्रचलित हैं. कई युवा हाई स्कूल या कॉलेज के बाद इसे गिफ्ट के रूप में लेते हैं. मां-बाप की भूमिका यहां खास है. कई परिवार बच्चों की पढ़ाई पूरी होने पर सर्जरी करवा देते हैं. कुछ माता-पिता मानते हैं कि बेहतर लुक से जॉब और शादी के मौके बेहतर होंगे. जॉब एप्लिकेशन में फोटो लगाना आम है और लुक को लेकर भेदभाव की शिकायतें भी आती रहती हैं.

सोशल मीडिया और के-पॉप इंडस्ट्री ने इस दबाव को और बढ़ाया है. आइडल और एक्ट्रेस का परफेक्ट चेहरा युवाओं के लिए आदर्श बन गया है. यह दबाव सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है. पुरुष भी सर्जरी करवा रहे हैं. पुरुष मरीजों की संख्या बढ़ रही है. चेहरे की फाइन-ट्यूनिंग, बालों के ट्रांसप्लांट और अन्य प्रोसीजर पुरुषों में भी लोकप्रिय हो रहे हैं. साउथ कोरिया की ब्यूटी कल्चर को “लुकिज्म” कहा जाता है यानी दिखावे को सर्वोपरि मानना. यहां त्वचा गोरी, चेहरा छोटा और वी-शेप, आंखें बड़ी और शरीर पतला होना आदर्श है. के-ब्यूटी प्रोडक्ट्स दुनिया भर में फेमस हैं लेकिन घरेलू स्तर पर सर्जरी का चलन और गहरा है. कई युवा बताते हैं कि स्कूल और कॉलेज में लुक को लेकर टिप्पणियां आम हैं. कुछ लड़कियां कहती हैं कि मां-दादी ने उन्हें सर्जरी के लिए प्रेरित किया. एक तरफ यह व्यक्तिगत पसंद है तो दूसरी तरफ सामाजिक दबाव साफ दिखता है. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बार-बार सर्जरी से जटिलताएं हो सकती हैं. नाक की सर्जरी में रिवीजन केस ज्यादा हैं क्योंकि इम्प्लांट या स्कार टिश्यू समस्या पैदा कर सकते हैं. मेडिकल टूरिज्म भी यहां फल-फूल रहा है. जापान, चीन, थाईलैंड और अमेरिका से लोग सर्जरी कराने आते हैं. सरकार इसे बढ़ावा देती है क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था को फायदा होता है. लेकिन अवैध ब्रोकर और घटिया क्लीनिक के मामले भी सामने आए हैं जिससे विदेशी मरीजों को जोखिम रहता है.