भारत की तरह अमेरिका में SIR लागू करेंगे ट्रंप? मिड टर्म इलेक्शन के पहले भारतीय चुनावी प्रणाली की तारीफ
वॉशिंगटन: पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सभी को चौंका दिया। यह पोस्ट भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बारे में थी। ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ करते हुए अमेरिका में वोटिंग के तरीके बदलने पर जोर दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ज्ञानेश कुमार ने उनके प्रशासन से पूछा था कि अमेरिका बिना वैलिट फोटो आईडी (पहचान पत्र) के चुनाव कैसे करा सकता है। इसके बाद ट्रंप ने भारत में चुनाव की तारीफ की और लिखा हमें अभी ‘SAVE AMERICA ACT’ पास करने की जरूरत है।
ट्रंप ने यह पोस्ट ज्ञानेश कुमार की भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात के कुछ दिनों बाद आई थी। ट्रंप ऐसे समय में सेव अमेरिका एक्ट को पास करने पर जोर लगा रहे हैं, जब इसी नवम्बर में देश में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। ट्रंप का ‘सेव अमेरिका एक्ट’ वोटिंग के लिए फोटो आईडी की योग्यता को सख्त बनाता है। इसके साथ ही ट्रंप मेल से वोटिंग पर भी कड़ी पाबंदियां लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप ने इस एक्ट को अमेरिकी चुनाव को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी बताया है और इसके लिए वे भारत का उदाहरण दे रहे हैं। हालांकि, यह नहीं पता चला है कि ट्रंप क्या भारतीय चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को भी अपना रहे हैं। भारत में चल रहे SIR का मकसद वोटर लिस्ट की जांच करना और उसे साफ-सुथरा बनाना है।
सेव अमेरिका एक्ट और SIR की तुलना करने में सावधान रहने की जरूरत है। दोनों की प्रक्रिया अलग है, लेकिन तर्क एक जैसे हैं। दोनों में नागरिकता, वोटर की योग्यता, साफ-सुथरी वोटर लिस्ट, पहचान जैसी बातों पर जोर दिया गया है।
ट्रंप की पोस्ट में ज्ञानेश कुमार का जिक्र अचानक नहीं है। इसी 12 अगस्त को ज्ञानेश कुमार ने नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की थी। दोनों की मुलाकात निर्वाचन सदन में हुई थी, जहां भारतीय चुनाव आयोग ने गोर को भारत में चुनाव प्रक्रिया के बारे में बताया और वोटर-पहचान प्रणाली के बारे में जानकारी दी। ट्रंप की पोस्ट इस मुलाकात के कुछ दिन बाद ही आई।
ट्रंप की ट्रुथ सोशल पोस्ट से ज्यादा महत्वपूर्ण वह है, जो वॉइट हाउस कह रहा है। वॉइट हाउस ने SAVE अमेरिका एक्ट के लिए दलील देते हुए भारत और ब्राजील की चुनाव प्रणालियों का उदाहरण दिया है। इसके मुकाबले अमेरिका में नियमों को लचीला बताया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि भारत और ब्राजील में वोटर आईडी को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ा जाता है, जबकि अमेरिका में नागरिकता के लिए खुद के दावे पर भरोसा किया जाता है।
सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी (SAVE) अमेरिका एक्ट के तहत वोटर की पहचान से जुड़े नियम कड़े कर दिए जाएंगे।
एक्ट के तहत संघीय वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी सबूत देना जरूरी होगा।
ट्रंप का मकसद डाक से होने वाले मतदान पर भी सख्त रोक लगाना है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 29% अमेरिकी मतदाताओं ने इसी तरीके को चुना था।
अमेरिका में डाक से भेजे गए वोट की भारत से तुलना करें तो भारी अंतर नजर आता है। भारत में 2024 के चुनाव डाले गए कुल वोटों में से केवल 0.66% वोट पोस्ट बैलेट से थे। ट्रंप का कहना है कि धोखाधड़ी रोकने और गैर-नागरिकों को अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने से रोकने के लिए ये उपाय जरूरी हैं।
