पेंट्री कार का खाना खाने से बच्चे बीमार, 1 घंटे के लिए खंडवा में रोकी गई ट्रेन, मेडिकल टीम ने संभाला मोर्चा

मध्य प्रदेश के खंडवा रेलवे स्टेशन आधी रात को अस्पताल में तब्दील हो गया। डॉक्टरों की टीम ट्रेन में सफर कर रहे बच्चों के इलाज के लिए मौके पर पहुंचे। इस दौरान ट्रेन खड़ी रही। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद ही ट्रेन को रवाना होने की इजाजत दी गई। हजरत निजामुद्दीन से एर्नाकुलम जा रही 12618 मंगला एक्सप्रेस में सफर कर रहे स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

जानकारी के अनुसार, फूड पॉइजनिंग के कारण बच्चों को उल्टी, दस्त और तेज बुखार की शिकायत हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे विभाग में खंडवा जिला प्रशासन से संपर्क किया। खंडवा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को 1 घंटे के लिए रोका गया। स्वास्थ्य विभाग और रेलवे की मेडिकल टीम ने सभी बच्चों का इलाज किया। बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के बाद ही ट्रेन को खंडवा रेलवे स्टेशन से रवाना किया गया।

जानकारी के अनुसार, केरल के त्रिचुर स्थित एक स्कूल का दल दिल्ली के शैक्षणिक भ्रमण से वापस लौट रहा था। शुक्रवार दोपहर के समय बच्चों ने ट्रेन की पैंट्रीकार से भोजन किया था। भोजन करने के लगभग चार घंटे बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों को पेट दर्द, उल्टी-दस्त और बुखार शुरू हो गया। घबराए स्कूल प्रबंधन और रेलवे स्टाफ ने तुरंत रेलवे कंट्रोल रूम को सूचना देकर मेडिकल इमरजेंसी की मदद मांगी।

सूचना मिलते ही खंडवा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आ गया। शुक्रवार देर रात जैसे ही ट्रेन खंडवा स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंची, वहां डॉक्टरों और अधिकारियों का दल पहले से मौजूद था। ​स्टेशन पर स्थिति को संभालने के लिए एसडीएम ऋषि सिंघाई, सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह, अभिनव बारंगे, सीएमएचओ डॉ ओपी जुगतावत, सिविल सर्जन डॉ अनिरुद्ध कौशल, मनोज सोनी और सतनाम सिंह होरा सहित पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।

सीएमएचओ डॉ ओपी जुगतावत ने बताया की कुल 30 बच्चों को फूड पॉइजनिंग का असर हुआ था, जिनमें से 5 बच्चों की स्थिति काफी गंभीर थी। डॉक्टरों की टीम ने ट्रेन की बोगी में ही बच्चों की दो बार गहन जांच की। सभी बच्चों को जरूरी दवाइयां, इंजेक्शन और ओआरएस के पैकेट उपलब्ध कराए गए। डॉक्टरों के तत्काल इलाज से बच्चों की स्थिति स्थिर हुई।

प्राथमिक उपचार के बाद जब बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ, तब ट्रेन को आगे की यात्रा के लिए रवाना किया गया। रेलवे प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए रेलवे के डॉक्टरों की एक विशेष टीम को भी ट्रेन में साथ भेजा, जो बच्चों की निगरानी करते हुए अगले बड़े स्टेशन भुसावल तक साथ गई। जिला प्रशासन और डॉक्टरों की त्वरित सक्रियता से एक बड़ा हादसा टल गया।