यहां गाय-बकरी नहीं, बारहसिंघा का दूध पीते हैं लोग, दुनिया में है सबसे अनोखा मिल्क!

मंगोलिया की ठंडी और कठिन जलवायु में जीवन आसान नहीं है. उत्तर के टैगा क्षेत्रों में तापमान बहुत कम हो जाता है और संसाधन सीमित रहते हैं. ऐसी परिस्थितियों में एक खास समुदाय रहता है जो गाय-भैंस या बकरी के बजाय रेनडियर पालता है. हिंदी में इसे कभी-कभी बारहसिंघा कह दिया जाता है हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह रेनडियर (रंगिफर टारंडस) है.

इन लोगों को दुखा या त्सातान कहा जाता है. वे रेनडियर का दूध निकालकर पीते हैं और इसे दुनिया के अनोखे मिल्क्स में गिना जाता है. दुखा समुदाय मंगोलिया के खोव्सगोल प्रांत के जंगली और पहाड़ी इलाकों में घुमंतू जीवन जीता है. वे रेनडियर को मुख्य रूप से दूध, परिवहन और ऊन के लिए पालते हैं. दूध निकालना महिलाओं का काम होता है. सुबह बछड़ों को बांध दिया जाता है ताकि मां का दूध जमा हो. दोपहर बाद दूध दुहा जाता है. बचे हुए दूध को बछड़ों के लिए छोड़ दिया जाता है.

रेनडियर का दूध गाढ़ा, पौष्टिक और खास स्वाद वाला होता है. इसमें फैट और प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है जो ठंडे मौसम में ऊर्जा प्रदान करती है. लोग इसे चाय में मिलाकर पीते हैं, दही, पनीर और यहां तक कि ब्रेड भी बनाते हैं. रेनडियर मिल्क ब्रेड इस समुदाय की खास पहचान है. दूध को नदी के ठंडे पानी में रखकर सुरक्षित रखा जाता है. मांस की बात करें तो दुखा लोग रेनडियर को आसानी से नहीं मारते. वे इसे परिवार का हिस्सा मानते हैं. मांस तभी खाया जाता है जब जानवर स्वाभाविक रूप से मर जाए. आहार मुख्य रूप से दूध उत्पादों, जंगली शिकार और अन्य उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करता है. रेनडियर पर सवारी भी की जाती है और सामान ढोने के काम आता है.

यह जीवनशैली बेहद कठिन है. सर्दी में तापमान माइनस में चला जाता है. भेड़ियों से सुरक्षा, चारे की व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं से दूरी चुनौतियां पैदा करती है. फिर भी समुदाय अपनी परंपराओं को बचाए रखने की कोशिश कर रहा है. युवा पीढ़ी को दूध दुहने और डेयरी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि ज्ञान आगे बढ़े. रेनडियर मिल्क को अनोखा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आम डेयरी जानवरों से अलग प्रजाति का है और बहुत कम जगहों पर ही उपलब्ध होता है. पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण यह ठंडे इलाकों में जीवनयापन के लिए आदर्श है. स्वाद और बनावट भी गाय के दूध से भिन्न होती है. मंगोलिया में अन्य जानवरों जैसे घोड़ा, ऊंट, याक, भेड़-बकरी का दूध भी पिया जाता है लेकिन रेनडियर मिल्क दुखा समुदाय तक सीमित है. यह उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है.