इंजीनियर बनी इस जनजाति की महिलाएं, गांव-गांव लगा रही सोलर पैनल
तंजानिया की मसाई जनजाति सदियों से अपनी पारंपरिक जीवनशैली के लिए जानी जाती है. ये लोग मुख्य रूप से पशुपालन पर निर्भर रहते हैं, रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं और मॉडर्न दुनिया से काफी दूर अपनी संस्कृति संजोए हुए हैं. लेकिन अब इस जनजाति में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है. मसाई समुदाय की महिलाएं अब सोलर इंजीनियर बन रही हैं. वे खुद ट्रेनिंग लेकर दूर-दराज के गांवों में सोलर पैनल लगा रही हैं और उन इलाकों में उजाला फैला रही हैं जहां आज तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंच पाई थी. यह कहानी सिर्फ सोलर एनर्जी की नहीं है. यह महिलाओं के सशक्तिकरण, स्थानीय नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की कहानी है. पहले ये महिलाएं घर और परिवार तक सीमित रहती थीं. अब वे तकनीकी कौशल सीखकर पूरे समुदाय की जिंदगी बदल रही हैं.
ये महिलाएं अब तक दर्जनों गांवों में रोशनी पहुंचा चुकी है और यह सिलसिला जारी है. मसाई जनजाति पूर्वी अफ्रीका में तंजानिया और केन्या के इलाकों में पाई जाती है. इनकी आबादी लाखों में है और ये अर्ध-खानाबदोश जीवन जीते हैं. पारंपरिक रूप से पुरुष पशु चराते हैं जबकि महिलाएं घर संभालती हैं, पानी लाती हैं और बच्चों की देखभाल करती हैं. शिक्षा और तकनीकी ज्ञान तक महिलाओं की पहुंच बहुत कम थी. लेकिन पिछले कुछ सालों में विभिन्न संगठनों और स्थानीय पहलों के जरिए महिलाओं को सोलर टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी जा रही है. ट्रेनिंग में महिलाओं को सोलर पैनल लगाना, सिस्टम चेक करना, छोटी-मोटी खराबी ठीक करना और मेंटेनेंस सिखाया जाता है. वे बैटरी, इनवर्टर और वायरिंग की बेसिक समझ विकसित करती हैं. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ये महिलाएं अपने और आसपास के गांवों में जाकर पैनल इंस्टॉल करती हैं. कई बार वे टीम बनाकर काम करती हैं और एक-दूसरे की मदद करती हैं.
सोलर पैनल लगने से गांवों में क्या बदलाव आया है, यह देखकर हैरानी होती है. पहले अंधेरे में बच्चे पढ़ नहीं पाते थे. अब सोलर लाइट की रोशनी में वे रात को भी पढ़ाई कर सकते हैं. महिलाएं रात में घर का काम आसानी से कर लेती हैं. छोटे दुकानदार अपने व्यापार को शाम बाद भी चला सकते हैं. मोबाइल फोन चार्ज हो जाते हैं जिससे संचार आसान हुआ है. स्वास्थ्य केंद्रों में भी रोशनी मिलने से आपातकालीन सेवाएं बेहतर हुई हैं. सोलर एनर्जी रिमोट इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प है. बड़ी बिजली ग्रिड बिछाने में सालों लग जाते हैं और भारी खर्च आता है. सोलर पैनल सूरज की रोशनी से सीधे बिजली बनाते हैं. तंजानिया जैसे देश में धूप भरपूर मिलती है इसलिए यह तकनीक बहुत कारगर साबित हो रही है. स्थानीय महिलाएं जब खुद इसे संभालती हैं तो सिस्टम लंबे समय तक चलता रहता है क्योंकि मेंटेनेंस की समस्या नहीं होती. इस पहल से महिलाओं को आर्थिक आजादी भी मिल रही है. वे इंस्टॉलेशन का काम करके कमाई कर रही हैं. कुछ महिलाएं सोलर प्रोडक्ट्स बेचने का व्यवसाय भी शुरू कर चुकी हैं. परिवार में उनकी स्थिति मजबूत हुई है और फैसले लेने में उनकी राय मायने रखने लगी है.
