यहां आज भी सुरक्षित है गणेश जी का असली मानव मस्तक
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती के आदेश पर जब बालक गणेश ने भगवान शिव को द्वार पर रोका, तो महादेव ने क्रोध में आकर अपने त्रिशूल से उनका मस्तक धड़ से अलग कर दिया था. इसके बाद गणेश जी के धड़ पर गज यानी हाथी का सिर लगाकर उन्हें नया जीवन दिया गया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बप्पा का असली मानव मस्तक कटने के बाद कहां गिरा था. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का वो मूल सिर आज भी धरती पर एक गुफा में सुरक्षित मौजूद है. आइए जानते हैं कलयुग के इस सबसे बड़े धार्मिक रहस्य के बारे में.
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट के पास एक बेहद रहस्यमयी गुफा स्थित है. इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव द्वारा काटा गया गणेश जी का असली मानव सिर इसी गुफा में गिरा था.
गुफा के अंदर गणेश जी के कटे हुए मस्तक को एक पवित्र शिला के रूप में पूजा जाता है. श्रद्धालु इस स्थान को आदि गणेश का निवास स्थान मानते हैं और यहां दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं. पाताल भुवनेश्वर गुफा के भीतर स्थित आदि गणेश की शिला के ठीक ऊपर एक अद्भुत प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलता है.
इस शिला के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला एक दिव्य ब्रह्मकमल बना हुआ है. इस ब्रह्मकमल से लगातार जल की बूंदें टपकती रहती हैं और सीधे गणेश जी के मस्तक रूपी शिला पर गिरती हैं. मान्यता है कि इस जल से भगवान गणेश का निरंतर प्राकृतिक अभिषेक होता रहता है.
इस रहस्यमयी गुफा के बारे में एक और गहरी मान्यता प्रचलित है. कहा जाता है कि भगवान शिव स्वयं इस गुफा में विराजमान रहकर गणेश जी के कटे हुए सिर की रक्षा करते हैं. इसी कारण पाताल भुवनेश्वर को भगवान शिव और गणेश जी का एक साझा और अत्यंत पवित्र धाम माना जाता है. यहाँ की हर एक शिला और गुफा का कोना-कोना भोलेनाथ की विशेष ऊर्जा और भक्ति से भरा हुआ प्रतीत होता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार कलयुग में इस पवित्र गुफा की खोज महान संत आदि शंकराचार्य ने की थी. जब वे उत्तराखंड की यात्रा पर थे, तब उन्हें इस गुफा के भीतर छुपे धार्मिक रहस्यों का ज्ञान हुआ. उन्होंने ही इस गुफा के अंदर मौजूद शिलाओं को पहचाना और यहां पूजा-अर्चना की परंपरा दोबारा शुरू करवाई. तब से लेकर आज तक यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है.
पाताल भुवनेश्वर गुफा अपनी अनूठी प्राकृतिक आकृतियों और गुफा तंत्र के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है. गुफा के अंदर बनी शिलाओं को विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूप के रूप में पूजा जाता है. हालांकि गणेश जी के सिर वाली बात धार्मिक लोकमान्यताओं पर आधारित है, लेकिन यहां पहुंचने वाले भक्तों को एक अलग ही शांति और अलौकिक शक्ति का अहसास होता है.
