Pitru Paksha 2026: श्राद्ध के दिन घर का खाना खाना सही या गलत? प्रेमानंद महाराज ने बताया सही नियम
पितरों को समर्पित श्राद्ध पक्ष में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं. इस दौरान खान-पान को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. सबसे आम सवाल यह रहता है कि जिस दिन घर में किसी पूर्वज का श्राद्ध हो, उस दिन परिवार के लोग घर में बना भोजन खा सकते हैं या नहीं?
इसी सवाल को लेकर एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया था. उनके जवाब का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. महाराज ने श्राद्ध के दिन भोजन करने के क्रम और ब्राह्मण भोज के महत्व के बारे में बताया है.
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जिस दिन घर में किसी पूर्वज का श्राद्ध हो, उस दिन सबसे पहले विधि-विधान के अनुसार ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए. उन्होंने कहा कि श्राद्ध कर्म में ब्राह्मण का सम्मानपूर्वक स्वागत करने, उनके पैर धोने, आरती करने और उन्हें आसन पर बैठाकर भोजन कराने की परंपरा बताई गई है.
उनके अनुसार अपनी सामर्थ्य के हिसाब से एक या अधिक ब्राह्मणों को भोजन कराया जा सकता है. भोजन के बाद दक्षिणा देने की भी बात कही गई है. इसके बाद परिवार के सदस्य श्राद्ध का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं.
इस परंपरा के अनुसार श्राद्ध के लिए तैयार किए गए भोजन को पहले निर्धारित विधि से अर्पित और ब्राह्मण भोज कराया जाता है. इसके बाद परिवार के लोग प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करते हैं.
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि श्राद्ध के दिन घर के सदस्य भोजन ही नहीं कर सकते. मुख्य बात भोजन करने के क्रम और श्राद्ध कर्म की परंपरा से जुड़ी है. अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में श्राद्ध की विधि में कुछ अंतर भी हो सकता है.
श्राद्ध में सात्विक भोजन का महत्व
श्राद्ध कर्म के दौरान आमतौर पर सात्विक भोजन तैयार करने की परंपरा है. कई परिवारों में प्याज-लहसुन और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. भोजन में मौसमी सब्जियां, दाल, चावल, पूरी, खीर और अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं.
हालांकि, श्राद्ध के भोजन की सामग्री और नियम हर क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं. इसलिए अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय धार्मिक रीति का पालन करना उचित माना जाता है.
श्राद्ध में ब्राह्मण भोज क्यों कराया जाता है?
हिंदू धार्मिक परंपरा में श्राद्ध कर्म के दौरान ब्राह्मण भोज को महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि श्रद्धा और विधि के साथ कराया गया भोजन पितरों को समर्पित होता है. इसी कारण श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने की परंपरा कई स्थानों पर देखने को मिलती है.
प्रेमानंद महाराज ने भी अपने जवाब में श्राद्ध के दिन ब्राह्मण को सम्मानपूर्वक भोजन कराने और उसके बाद प्रसाद ग्रहण करने की बात कही है.
श्राद्ध में सबसे जरूरी है श्रद्धा
श्राद्ध शब्द ही श्रद्धा से जुड़ा है. इसलिए इस कर्मकांड का उद्देश्य केवल भोजन बनाना या किसी विशेष नियम का पालन करना नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना भी माना जाता है.
अगर किसी परिवार में श्राद्ध की अलग परंपरा चली आ रही है, तो उसी के अनुसार कर्म करना उचित है. धार्मिक मान्यताओं को लेकर अलग-अलग संप्रदायों और क्षेत्रों में मतभेद हो सकते हैं, इसलिए किसी एक परंपरा को सभी के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए.
