दुर्ग यूनिवर्सिटी के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप सस्पेंड, हाईकोर्ट से अटैचमेंट रद्द होने के 3 दिन बाद निलंबित

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू होगा। शासन ने यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत की है।

आदेश में महिला कर्मचारी के वेतन से कथित तौर पर 1.49 लाख रुपए से ज्यादा की रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर कराने के मामले का जिक्र है। इसके अलावा विश्वविद्यालय में अधिकारों के गलत इस्तेमाल और दूसरी गड़बड़ियों का भी उल्लेख किया गया है। निलंबन के दौरान भूपेंद्र कुमार कुलदीप का मुख्यालय उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन, अटल नगर, नवा रायपुर रहेगा।

भूपेंद्र कुमार कुलदीप के मामले में पिछले कुछ दिनों से लगातार नए घटनाक्रम सामने आ रहे थे। 29 सितंबर को उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें कुलसचिव के पद से हटाकर रायपुर स्थित उच्च शिक्षा संचालनालय में अटैच कर दिया था। उनकी जगह दुर्ग के शासकीय वीवाईटी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था।

इस आदेश को भूपेंद्र कुलदीप ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने शासन के अटैचमेंट आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद कुलदीप विश्वविद्यालय में दोबारा जॉइनिंग देने पहुंचे, लेकिन उनके कक्ष में ताला लगा मिला। अब 12 अक्टूबर को राज्य शासन ने उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है।

कुलदीप के खिलाफ दुर्ग के मोहन नगर थाने में 3 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत विश्वविद्यालय की दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे के वेतन से जुड़ी है। आरोप है कि कर्मचारी का मासिक वेतन 11,515 रुपए निर्धारित था, लेकिन उन्हें 2,200 रुपए दिए जाते थे और शेष रकम फोनपे या पेटीएम के माध्यम से कुलदीप के बेटे के खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, 6 फरवरी 2025 से 4 जुलाई 2026 के बीच कथित तौर पर 1,49,384 रुपए का लेनदेन हुआ। इस मामले में कुलदीप को 3 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसी दिन थाने से मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

शासन के ताजा आदेश में भी इस एफआईआर और उनके जमानत पर होने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, आपराधिक मामले में आरोप साबित होने का अंतिम फैसला अदालत को करना है।

शासन के आदेश में दुर्ग संभाग के आयुक्त की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि कुलपति से अधिकार मिलने के बिना ही कुलसचिव अपने स्तर पर अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे थे। इसे गंभीर अनियमितता माना गया है।

आदेश में 24 जुलाई को जारी कारण बताओ नोटिस और 10 अक्टूबर को विभागीय जांच शुरू करने के प्रस्ताव का भी जिक्र है। इससे पहले 29 अगस्त को विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कुलदीप के वित्तीय अधिकार वापस लेने का फैसला किया था।