रूस ने 39 मिसाइल-120 ड्रोनों से यूक्रेन की बिजली-रेलवे पर किया बड़ा हमला

यूक्रेन पर रूस ने एक बार फिर बड़ा हमला किया है. 13 अक्टूबर की रात भर चले इस हमले में रूसी सेना ने 39 बैलिस्टिक मिसाइलें और 120 से ज्यादा हमलावर ड्रोन गिराए. निशाना मुख्य रूप से कीव, कीव क्षेत्र और खार्किव की ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण सुविधाएं थीं. इस हमले से कम से कम 6 लाख लोग बिजली के बिना रह गए हैं. नुकसान काफी ज्यादा है और स्थिति और बिगड़ सकती है. रेलवे को भी नुकसान पहुंचा है.

रूस ने इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का मिश्रण इस्तेमाल किया. ये मिसाइलें बहुत तेज रफ्तार से आती हैं और बचाव करना मुश्किल होता है. ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन लंबे समय तक हवा में घूमकर निशाना साधते हैं. यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार यह हमला पूरी तरह जानबूझकर किया गया था.

खास बात यह है कि निशाना उन बिजली फैसिलिटी पर था जिनके बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की थी. रूस ने इस घोषणा का खुला उल्लंघन किया. यूक्रेन का कहना है कि रूस ने अमेरिका के प्रति इतना खुला अनादर पहले कभी नहीं दिखाया. इससे साफ है कि रूस शांति की बजाय युद्ध जारी रखना चाहता है.

हमले में बिजली व्यवस्था की 26 सुविधाएं और तेल-गैस क्षेत्र की 4 सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुईं. कई जगह उपकरण नष्ट हो गए. मरम्मत के काम में लगे कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. यूक्रेन की आपात सेवा और ऊर्जा कर्मियों की सराहना की गई है. दुर्भाग्य से इस हमले में जानें भी गईं और कई लोग घायल हुए.

बिजली कटौती 6 लाख लोगों को प्रभावित कर रही है. यह संख्या बढ़ सकती है. सर्दी के मौसम में बिजली न होना आम लोगों के लिए बहुत मुश्किल पैदा करता है. घर ठंडे पड़ जाते हैं, पानी की सप्लाई प्रभावित होती है और अस्पतालों तथा जरूरी सेवाओं पर असर पड़ता है.

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अमेरिका और पूरी दुनिया से जोरदार जवाब देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि रूस ने तनाव कम करने का मौका गंवा दिया है और विनाश का युद्ध जारी रखने का फैसला किया है. खास तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप से सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है. हाल ही में लिंडसे ग्राहम बिल पास होकर कानून बन चुका है जो ऐसे कदमों को मंजूरी देता है. इसके अलावा पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर की और खेप भेजने की भी मांग की गई है.

ये मिसाइलें आने वाली रूसी मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराने में मदद करती हैं. यूक्रेन का कहना है कि कोई भी देश अकेला ऐसे हमलावर का सामना नहीं कर सकता. शांति ताकत से ही आ सकती है. यह बात रेगन के सिद्धांत की याद दिलाती है.

यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक संदेश भी है. रूस यह दिखाना चाहता है कि वह अमेरिकी बयानों से प्रभावित नहीं है. बिजली फैसिलिटी को निशाना बनाकर वह यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और आम जिंदगी को कमजोर करना चाहता है. सर्दी आने वाली है इसलिए बिजली कटौती का असर और गहरा होगा.

यूक्रेन लगातार मदद मांग रहा है क्योंकि अकेले लड़ना मुश्किल हो रहा है. अमेरिका और यूरोप अगर सख्त कदम उठाते हैं तो रूस पर दबाव बढ़ सकता है. प्रतिबंध और हथियार दोनों जरूरी माने जा रहे हैं. युद्ध के ये हमले सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं रहते. बिजली गुल होने से घर, स्कूल, अस्पताल सब प्रभावित होते हैं.

मरम्मत में समय लगता है और खर्च भी बहुत आता है. यूक्रेन के लोग रात-रात भर अंधेरे में रहने को मजबूर हो सकते हैं. दुनिया भर में इस युद्ध का असर ऊर्जा कीमतों और सुरक्षा पर पड़ता है. शांति तभी संभव है जब हमलावर पर पर्याप्त दबाव हो. यूक्रेन मदद के लिए आभारी है लेकिन और समर्थन की जरूरत बता रहा है.

यह हमला युद्ध की क्रूरता को फिर याद दिलाता है. रूस की कार्रवाई ने तनाव और बढ़ा दिया है. अब अमेरिका और सहयोगियों के अगले कदम पर सबकी नजर है. ताकत के साथ शांति का रास्ता ही इस संकट से निकास दे सकता है.