छत्तीसगढ़ के ‘राष्ट्रपति’ नाम वाले व्यक्ति का मामला पहुंचा राष्ट्रपति भवन, नाम रखने पर कानून बनाने की मांग

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के रहने वाले शख्स ‘राष्ट्रपति’ का मामला अब देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है। जिले के ग्राम घुटरा में रहने वाले एक व्यक्ति का नाम ‘राष्ट्रपति’ है, और इसी नाम को लेकर अब देश में संवैधानिक पदों के व्यक्तिगत उपयोग पर कानूनी नीति बनाने की मांग उठाई गई है। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है।

यह मामला तब तूल पकड़ा जब ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने इस विषय को लेकर राष्ट्रपति सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में याचिका दाखिल की। उनकी इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रपति सचिवालय ने संबंधित केंद्रीय विभागों और गृह मंत्रालय को पत्र भेज दिया है। हालांकि, याचिका के अग्रेषित होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि किसी नए कानून को तत्काल मंजूरी मिल गई है, लेकिन इस पर केंद्रीय स्तर पर प्रक्रिया शुरू होने से मामला गंभीर हो गया है।

याचिकाकर्ता सौरव मिश्रा का तर्क है कि देश में ‘राष्ट्रपति’, ‘प्रधानमंत्री’, ‘मुख्यमंत्री’, ‘राज्यपाल’ और ‘भारत’ जैसे अति संवेदनशील और सर्वोच्च संवैधानिक पदों या राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में उपयोग को लेकर कोई स्पष्ट और ठोस कानूनी दिशा-निर्देश होने चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस मामले में विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर एक नया विधेयक या उपयुक्त कानूनी प्रावधान तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों को लेकर किसी भी प्रकार का असमंजस न रहे।

ग्रामीण की व्यक्तिगत पहचान बन चुके इस अनोखे नाम का इतिहास काफी पुराना है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति का नाम प्राथमिक स्कूल के दाखिला रजिस्टर में 14 जुलाई 1988 को ‘राष्ट्रपति’ दर्ज किया गया था। स्कूल के प्रधानपाठक अनिल राय का भी कहना है कि स्कूल के पुराने रिकॉर्ड में यही नाम दर्ज है और इसे लिखने में किसी तरह की तकनीकी या मानवीय गलती की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। संबंधित व्यक्ति की शैक्षणिक मार्कशीट और बैंक पासबुक में भी यही नाम अंकित है।

राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से याचिका को संबंधित विभागों तक पहुंचाए जाने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय इस पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या आने वाले समय में संवैधानिक पदों के नाम के व्यक्तिगत इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए कोई नया नियम बनेगा, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।