अमेरिका सोच भी नहीं सकता, हमारे पास ऐसे हथियार हैं- ईरान का दावा

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के प्रवक्ता ने हालिया बयान में दावा किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका उनके शाहेद-136 ड्रोन की नकल कर रहा है और उसका इस्तेमाल कर रहा है. यह बयान IRGC के एयरोस्पेस डिवीजन की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए दिया गया.

प्रवक्ता के अनुसार एयरोस्पेस डिवीजन ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. ईरान अब सैन्य उपकरणों का आयातक नहीं बल्कि निर्यातक बन चुका है. उनकी हवाई तकनीक दुश्मन देशों की तकनीक से आगे निकल गई है. जनरल मोहम्मदी ने कहा कि मिसाइल, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उद्योग पर ध्यान केंद्रित करके शक्ति संतुलन स्थापित किया गया है.

मिसाइलों को प्राथमिकता देकर वे दुश्मन के उपकरणों का मुकाबला करने में सक्षम हुए हैं. पिछले कुछ हफ्तों में उन्होंने सात MQM-170 टोही ड्रोन को सफलतापूर्वक गिराया. इसे दुश्मन की तकनीक पर अपनी तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण बताया गया.

IRGC प्रवक्ता ने बताया कि एयरोस्पेस डिवीजन की एक और उपलब्धि वायु रक्षा प्रणालियों के एडवांसमेंट में तेजी से प्रगति है. 33 दिन के युद्ध के बाद इस डिवीजन ने 260 दुश्मन विमानों को निशाना बनाने में सफलता हासिल की. जनरल मोहम्मदी ने जोर देकर कहा कि वे दुश्मन को कभी भी मिसाइल उत्पादन और एडवांसमेंट रोकने की अनुमति नहीं देंगे.

युद्ध के दौरान और दुश्मन की बमबारी के बीच भी मिसाइल तथा ड्रोन उत्पादन जारी रखने के लिए लचीली क्षमताएं विकसित की गई हैं. इन्हीं क्षमताओं की बदौलत उत्पादन सुविधा को जमीन के ऊपर से तेजी से भूमिगत सुरक्षित केंद्र में स्थानांतरित किया जा सका. ये बयान ईरान की सैन्य आत्मनिर्भरता और युद्धकालीन निरंतरता पर जोर देते हैं.

जनरल मोहम्मदी के अनुसार एयरोस्पेस उद्योग की उल्लेखनीय उपलब्धियां तीसरी लहर के संघर्ष की स्थिति में सामने लाई जाएंगी. प्रवक्ता ने कहा कि आज सय्यद मुज्तबा मूसवी जनता और IRGC के बीच के रिश्ते का प्रतीक हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दुश्मन गलती करते हैं तो अगली प्रतिक्रियाएं और अधिक मजबूत होंगी तथा उन्हें वर्षों तक अपाहिज कर देंगी.

इस सप्ताह विशेष एयरोस्पेस उपकरण विभिन्न स्थानों और सड़कों पर तैनात किए जाएंगे ताकि जनता उन्हें करीब से देख सके. प्रवक्ता ने कहा कि दुश्मन को पता होना चाहिए कि सर्वोच्च नेता के संदेश ने सशस्त्र बलों में नई जान फूंक दी है. कोई भी आक्रामकता भारी कीमत चुकवाएगी. उनके पास दुश्मन को निष्क्रिय करने के कई विकल्प हैं जिन्हें अभी पूरी तरह उजागर नहीं किया जा सकता. संघर्ष विषम यानी एसिमेट्रिकल है जिसमें वे दुश्मन को अनपेक्षित स्थान पर प्रहार करके निष्क्रिय कर सकते हैं.

जनरल मोहम्मदी ने कहा कि मिसाइल सिटी का अनावरण IRGC एयरोस्पेस डिवीजन का जनता के लिए विशेष उपहार होगा. सैन्य उपकरणों के लिए पार्ट्स आयात करने की कोई जरूरत नहीं है. आज वायु सेना के सभी हथियार घरेलू ज्ञान और विशेषज्ञता से उत्पादित होते हैं. किसी अन्य देश से हथियार आयात नहीं किए जाते.

प्रवक्ता ने जोर दिया कि दुनिया को एक शक्तिशाली ईरान को महाशक्ति के रूप में पहचानना होगा और इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है. ये दावे ईरान की सैन्य रणनीति में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन आधारित प्रतिरोधक क्षमता को केंद्र में रखते हैं.

IRGC के ये बयान क्षेत्रीय तनाव और ईरान-अमेरिका तथा अन्य विरोधियों के बीच जारी रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच आए हैं. शाहेद-136 ड्रोन पहले भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा में रहा है क्योंकि विभिन्न संघर्षों में इसके इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं. ईरान नियमित रूप से अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं का प्रदर्शन करता है तथा आत्मनिर्भरता का दावा करता है.

भूमिगत सुविधाओं और लचीली उत्पादन क्षमता का जिक्र युद्धकालीन उत्तरजीविता पर उनके फोकस को दर्शाता है. साथ ही सार्वजनिक प्रदर्शन और जनता से जुड़ाव बढ़ाने के प्रयास घरेलू समर्थन को मजबूत करने की रणनीति लगते हैं. ये बयान रक्षात्मक और आक्रामक दोनों संदेश देते हैं. एक तरफ तकनीकी श्रेष्ठता और आत्मनिर्भरता का दावा है तो दूसरी तरफ किसी भी आक्रामकता की भारी कीमत चुकाने की चेतावनी.

क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषक ऐसे बयानों को शक्ति प्रदर्शन और मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा मानते हैं. वास्तविक क्षमताओं का आकलन स्वतंत्र स्रोतों से ही संभव है क्योंकि सैन्य दावे अक्सर रणनीतिक संदेश देने के लिए दिए जाते हैं. कुल मिलाकर IRGC अपने एयरोस्पेस क्षेत्र को ईरान की रक्षा नीति का मुख्य स्तंभ बता रहा है और भविष्य के किसी भी संघर्ष में इन क्षमताओं के इस्तेमाल का संकेत दे रहा है.