‘अंततः रिजल्ट मैटर करता है… ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा’, लोकसभा में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की शुरुआत हो गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सेना के शौर्य की सराहना की. उन्होंने कहा कि सेना ने 6-7 मई की रात ऐतिहासिक ऑपरेशन किया. पहलगाम आतंकी हमले में लोगों को धर्म पूछकर मारा गया. पहलगाम हमला अमानवीयता का सबसे बड़ा उदाहरण है. इसके बाद प्रधानमंत्री ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक कर निर्णायक कार्रवाई की छूट दी. हमारी सेना बलिदान में पीछे नहीं रहेगी. उन्होंने ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा कि हमने आतंकियों को उनके घर में घुसकर मारा. सेना ने आतंकियों से हमारी माताओं-बहनों के सिंदूर का बदला लिया. यह सिंदूर की लाली शौर्य की कहानी है. बहुत संभलकर बोल रहा हूं, इस कार्रवाई में सौ से अधिक आतंकी और हैंडलर मारे गए. मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक है. फिगर गलत न होने पाए. राजनाथ सिंह ने कहा कि ये हमले एस्केलेटरी नेचर के नहीं थे. जिन्ह मोहिं मारा, तिन्ह मोहिं मारे… हालांकि पाकिस्तान ने सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया. हमने इन हमलों को विफल कर दिया. इस एस्केलेशन पर हमारा जवाबी हमला नपा तुला था. हमारी कार्रवाई पूरी तरह से सेल्फ डिफेंस में थी. पाकिस्तान की ओर से हमले 7 मई से 10 मई की रात 1 बजकर 30 मिनट तक मिसाइल और लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल किया. 

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने यह कार्रवाई इसलिए रोकी, क्योंकि जो भी टार्गेट तय किए गए थे, हमने उन्हें हासिल कर लिया था. यह मानना कि भारत ने किसी दबाव में कार्रवाई रोकी, यह सरासर गलत है. ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने का उद्देश्य था उन टेरर नर्सरीज को खत्म करना, जिन्हें पाकिस्तान में वर्षों से पाला-पोसा गया था. हमारी सेनाओं ने केवल उनको टार्गेट किया, जो इन आतंकियों को सपोर्ट कर भारत को टार्गेट करने में लगातार इनवॉल्व थे. इस ऑपरेशन का उद्देश्य युद्ध छेड़ना नहीं था. 10 मई की सुबह जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की एयरफील्ड पर पर करारा प्रहार किया, तब पाकिस्तान ने हार मान ली. पाकिस्तान ने हमारे डीजीएमओ से बात की और कहा कि महाराज अब रोकिए. यह क्यों रोका, इसका पहले ही वर्णन कर चुका हूं. हमने इस आधार पर स्वीकार किया, कि यह ऑपरेशन केवल पॉज किया गया है. पाकिस्तान की ओर से अगर कुछ हुआ तो यह ऑपरेशन दोबारा शुरू होगा. पाकिस्तान की हार एक सामान्य विफलता नहीं, यह उसके सैन्यबल और मनोबल, दोनों की हार थी. पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ से संपर्क किया और कार्रवाई रोकने की अपील की. दोनों पक्षों में संवाद हुआ और हमने इसे रोकने का निर्णय लिया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना के शौर्य के दर्शन 140 करोड़ लोगों ने देखा.

राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष के लोग यह पूछते रहे हैं कि हमारे कितने विमान गिरे. यह प्रश्न जनभावनाओं का सही से प्रतिनिधित्व नहीं करता. उन्होंने हमसे कभी यह नहीं पूछा कि हमारी सेनाओं ने दुश्मन के कितने विमान मार गिराए. उनको प्रश्न ही पूछना है तो यह प्रश्न पूछें कि क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा, उत्तर है हां. राजनाथ सिंह ने कहा कि लक्ष्य जब बड़े हों, तो छोटे मुद्दों पर ध्यान नहीं जाना चाहिए. इससे देश की सुरक्षा, सैनिकों के सम्मान और उत्साह से ध्यान हट सकता है. विपक्ष के मित्र ऑपरेशन सिंदूर पर उचित प्रश्न नहीं पूछ पा रहे, तो क्या बताऊं. चार दशक से ज्यादा समय से राजनीति में हूं. कभी राजनीति को शत्रुतापूर्ण नजरिये से नहीं देखा है. आज हम सत्तापक्ष में हैं, तो जरूरी नहीं कि हमेशा सत्ता में ही रहेंगे. जनता ने हमें जब विपक्ष में रहने का दायित्व सौंपा, तब सकारात्मक तरीके से निभाया भी है. हमने 1962 में चीन के साथ युद्ध में दुखद परिणाम आया, तब हमने पूछा था कि हमारी धरती पर दूसरे देश का कब्जा कैसे हुआ.हमने पूछा कि सेना के जवान हताहत कैसे हुए. हमने मशीनों और तोपों की चिंता न करके देश की बेहतरी की चिंता की. 1971 में जूब हमने पाकिस्तान को सबक सिखाया, हमने राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की प्रशंसा की थी. अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में खड़े होकर उस समय के नेतृत्व की प्रशंसा की थी. हमने उस समय भी ऐसे प्रश्न नहीं पूछे. इसे और भी प्रैक्टिकल तरीके से समझाऊं, तो परीक्षा के परिणाम में रिजल्ट मैटर करता है. हमें बच्चे के मार्क्स का ध्यान रखना चाहिए, इस बात का नहीं कि एग्जाम के दौरान उसकी पेंसिल टूट गई थी. रिजल्ट यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारी सेनाओं ने जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसे पूर्ण रूप से प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की है. भारत पाकिस्तान समेत हर पड़ोसी देश से मित्रता और सौहार्दपूर्ण संबंधों का इच्छुक रहा है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर कोई हमारी संप्रभुता को नुकसान पहुंचाएगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा. हमारी मूल प्रकृति बुद्ध की है, युद्ध की नहीं. हम आज भी कहते हैं कि समृद्ध पाकिस्तान हमारे हित में है. हमने अब शांति स्थापित करने का दूसरा रास्ता अपनाया है. हमारी सरकार का स्टैंड बिल्कुल साफ है, जिसके मूल में लोकतंत्र का एक कतरा भी न हो, उसके साथ संवाद नहीं हो सकता. गोलियों की आवाज में संवाद की आवाज दब जाती है. पाकिस्तान की नीति और चरित्र को लेकर कोई भ्रम नहीं रहना चाहिए. यह ऐसा देश है, जो वैश्विक आतंकवाद की नर्सरी है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने देखा है कि पाकिस्तान की सरकार आतंकियों के लिए स्टेट फ्यूनरल का इंतजाम कर रही है और सैन्य अधिकारी भी इसमें भाग लेते हैं. पाकिस्तान की सेना और आईएसआई आतंकवाद को प्रॉक्सी वॉर के रूप में इस्तेमाल करती है. लोकतंत्र के मंदिर में खड़े होकर यह कह रहा हूं, कि भारत को थाउजैंड कट देने की बात करने वालों को अब जग जाना चाहिए. ये मोदी का भारत है. हमारी नीति कभी किसी दूसरे की एक इंच जमीन पर कब्जा करने का नहीं रहा है. हमारी सेना शेर है. पाकिस्तान जैसा