अजय चंद्राकर बोले- अभिजीत और आशुतोष AAP के एजेंट

दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की रैली में जुटी भीड़ को लेकर पूर्व मंत्री और कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि यह स्थापित तथ्य है कि आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता रहे हैं। अजय चंद्राकर ने कहा कि तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी के बावजूद रामलीला मैदान में कुर्सियां खाली रह गईं।

इससे विपक्ष की राजनीतिक ताकत और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदर्शन की सफलता का पैमाना क्या है, यह जनता तय करेगी।

बुधवार को बिलासपुर दौरे पर पहुंचे पूर्व मंत्री और कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने 1 नवंबर को दिल्ली में हुए विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के पास अब न मूल विचार बचे हैं और न ही मौलिकता। जनता से जुड़े मुद्दों पर बात करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं और EVM पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अजय चंद्राकर ने कहा कि जब कांग्रेस EVM से चुनाव जीतकर सत्ता में आती थी, तब उसे इस व्यवस्था से कोई परेशानी नहीं थी। लेकिन चुनाव हारने पर चुनाव आयोग और EVM पर सवाल खड़े किए जाने लगते हैं। यह कांग्रेस की दोहरी राजनीति है।

अजय चंद्राकर ने SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी बूथों पर कांग्रेस के BLO तक नहीं हैं। ऐसे में देशभर की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना सबसे जरूरी है। चुनाव में हार-जीत होती रहती है, लेकिन हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना ठीक नहीं है।

इससे पहले बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविद्यालय, सरकंडा में भाजपा की ओर से आयोजित ‘राष्ट्र चिंतन’ प्रबुद्धजन संगोष्ठी में भी अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर निशाना साधा। इस दौरान बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला भी मौजूद रहे।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए चंद्राकर ने कहा कि लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को अपने राजनीतिक इतिहास को भी याद रखना चाहिए।

जब EVM के जरिए भाजपा सत्ता में आई, तब कांग्रेस को इस व्यवस्था से कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन चुनाव परिणाम पक्ष में नहीं आने पर EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि बिना ठोस आधार के संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से जनता का विश्वास कमजोर होता है। विपक्ष का काम केवल सत्ता का विरोध करना नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाना भी है।

वैचारिक संवाद के मंच पर विपक्ष के लोगों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि लोकतंत्र से जुड़े विषयों पर स्वस्थ बहस हो सके।