इटली में हिंसक प्रदर्शनों के बीच भारतीयों के लिए एडवाइजरी, भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहने की सलाह

इटली में बढ़ती महंगाई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने सोमवार को भारतीयों से भीड़भाड़ वाली जगहों और प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने और स्थानीय खबरों पर नजर रखने को कहा है। इस बीच, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की घटनाओं के बाद सोमवार को इमरजेंसी सिक्योरिटी बैठक बुलाई है।

भारतीय दूतावास ने आपात स्थिति में मदद के लिए रोम और मिलान स्थित अपने कार्यालयों के नंबर जारी किए हैं।

रोम स्थित भारतीय दूतावास: +39 331 614 2085
मिलान स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास: +39 3881647527

इटली के कई शहरों में रविवार को बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हुए। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे इन प्रदर्शनों के दौरान मिलान में हिंसा भड़क गई।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर, कूड़ेदान और कुर्सियां फेंकीं। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

वीकेंड पर मिलान में 5,000 से ज्यादा लोग जुटे थे। हिंसा के दौरान दुकानों में लूटपाट की गई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।

इटली की न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पुलिस ने 200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। इनमें करीब 80% नाबालिग हैं। झड़पों में पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है।

हिंसा का असर इटली के दूसरे शहरों में भी देखने को मिला। मेलोनी के मुताबिक, ट्यूरिन में कुछ लोगों को पत्थर और शीशे तोड़ने वाले हथौड़े लेकर जाते समय हिरासत में लिया गया। वहीं, बोलोन्या में गड़बड़ी की आशंका के चलते एक रेलवे स्टेशन को एहतियातन बंद कर दिया गया।

मिलान के मेयर ग्यूसेपे साला ने कहा कि दुकानों के टूटे शीशे, लूटपाट और डरे हुए नागरिकों को देखकर चिंता होती है। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाएं दुनिया के कई शहरों में देखने को मिल रही हैं।

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा, ‘प्रदर्शन करना अधिकार है, लेकिन हमारे शहरों को बर्बाद करना नहीं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उपद्रवियों ने प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अराजकता फैलाने की कोशिश की।

मेलोनी ने विपक्षी दलों से भी हिंसा की स्पष्ट रूप से निंदा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी तरह की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हिंसा की निंदा करने में हिचकिचाहट को उसका समर्थन समझा जा सकता है।