छत्तीसगढ़ में 5 दिन अंधड़-बारिश का अलर्ट, 50 किमी की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं

छत्तीसगढ़ में मानसून की एंट्री के बावजूद बारिश अब तक कमजोर बनी हुई है। 1 जून से अब तक राज्य में 108.2 मिमी (4.2 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 33.2 मिमी (1.3 इंच) वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से करीब 69% कम है। मौसम विभाग के अनुसार, दंतेवाड़ा क्षेत्र से दक्षिण-पश्चिम मानसून ने प्रदेश में प्रवेश कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद बारिश की गतिविधियां अभी कमजोर बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है और कई इलाकों में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। कुछ इलाकों में बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मध्य छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में अगले दो दिनों तक अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। बारिश की कमी के कारण दिन के समय गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर सकती है।

सोमवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं, सबसे कम न्यूनतम तापमान जगदलपुर में 22.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मानसून की पहली सक्रियता का असर बस्तर संभाग में दिखाई दिया है। हालांकि यहां भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। बस्तर जिला प्रदेश में सबसे बेहतर स्थिति में है, लेकिन यहां भी सामान्य से लगभग 48 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं दंतेवाड़ा और सुकमा में भी बारिश की कमी साफ दिखाई दे रही है।

राजधानी रायपुर में मंगलवार को मौसम का मिजाज बदला हुआ रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक दिनभर बादल छाए रहने के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना है। शहर का अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की खेती पर निर्भर प्रदेश के कई हिस्सों में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। अगर आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां नहीं बढ़ीं, तो इसका असर खेती और जल स्रोतों पर भी पड़ सकता है।