1 करोड़ के हवाला कांड में अंबिकापुर के प्रशिक्षु IPS की बढ़ीं मुश्किलें, CBI जांच की मांग…

अंबिकापुर : प्रशिक्षु आइपीएस व सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोप से जुड़े मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने 10 हजार रुपये जुर्माना जमा करने की शर्त पर अगली सुनवाई 25 अगस्त तय की है।

विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिनेश कुमार सीबीआइ 11 की अदालत में यह प्रकरण लंबित है। याचिकाकर्ता आकाश कुमार ने बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत सीबीआइ को एफआइआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशिक्षु आइपीएस अधिकारी ने हवाला के माध्यम से एक करोड़ रुपये की रिश्वत ली।
इस साजिश में एएसआइ प्रवीण राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा भी शामिल थे।याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की गंभीरता और अंतरराज्यीय लेन-देन को देखते हुए इसकी जांच सीबीआइ से कराई जानी चाहिए। मंगलवारको हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता साहिबा सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुईं। सीबीआइ की ओर से विशेष लोक अभियोजक अवनीश चंद, प्रशिक्षु आइपीएस राहुल बंसल की ओर से अधिवक्ता मनीष तिवारी और एएसआइ प्रवीण राठौर व आरक्षक अंशुल शर्मा की ओर से अधिवक्ता हर्षि गौर मौजूद थीं।

न्यायाधीश ने शुरू में ही स्पष्ट किया कि पहले इस बात पर बहस होगी कि दिल्ली की इस अदालत को सीबीआइ को एफआइआर दर्ज करने का निर्देश देने का अधिकार क्षेत्र है या नहीं। पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने इसी बिंदु पर दलीलें मांगी थीं, लेकिन तब अधिवक्ता ने समय मांगा था।आज भी अधिवक्ता साहिबा सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही बहस करना उचित होगा। उन्होंने कहा कि वे इस समय मुंबई में एक अन्य मामले के सिलसिले में हैं और व्यक्तिगत रूप से बहस करना चाहती हैं, इसलिए तारीख आगे बढ़ाई जाए।

प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं ने समय देने का विरोध किया। अधिवक्ताओं ने कहा कि याचिकाकर्ता इस लंबित याचिका का इस्तेमाल मीडिया में प्रतिवादियों को बदनाम करने और अलग-अलग फोरम से अपने पक्ष में आदेश लेने के लिए कर रहा है। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि प्रतिवादी साबित करें कि उनके पास ऐसा कोई प्रमाण है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इस स्तर पर किसी के आरोपों की जांच नहीं करेगा और सिर्फ याचिका पर ध्यान देगा।

कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि पिछली तारीख को भी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने व्यक्तिगत बहस के लिए समय मांगा था। लगातार दो तारीखों से बहस टल रही है। न्याय के हित में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अधिकार क्षेत्र पर बहस करने का अंतिम अवसर दिया।लेकिन इसके साथ कोर्ट ने शर्त रखी कि अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 से पहले याचिकाकर्ता को 10,000 रुपये डीएलएसए केंद्रीय के पास शुल्क के रूप में जमा करने होंगे। कोर्ट ने कहा कि यह विलंब के कारण लगाया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने 10 हजार का जुर्माना अधिक बताते हुए सितंबर में तारीख देने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह आवेदन एक जुलाई 2026 से लंबित है, इसलिए प्राथमिकता से सुनवाई जरूरी है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने यह भी बताया कि वे 31 अगस्त 2026 तक दिल्ली में उपलब्ध नहीं होंगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तारीख नहीं बदलेगी।

हालांकि कोर्ट ने छूट दी कि अधिवक्ता 25 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बहस कर सकती हैं।अब 25 अगस्त को कोर्ट सबसे पहले याचिका की “सुनवाई योग्यता” और अधिकार क्षेत्र पर दलीलें सुनेगा। इसके बाद ही सीबीआइ जांच के निर्देश पर निर्णय होगा।