ब्रिटेन में 2 भारतवंशियों को मिला मंत्री पद
लदंन: ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने पदभार संभालने के बाद अपनी नई कैबिनेट की घोषणा कर दी है। नई मंत्रिपरिषद में कई अनुभवी चेहरों को बरकरार रखा गया है, जिनमें भारतीय मूल के दो प्रमुख नेता—कनिष्क नारायण और लीजा नंदी—भी शामिल हैं। नई कैबिनेट में कनिष्क नारायण को कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence – AI) मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि भारतीय मूल की वरिष्ठ नेता लीजा नंदी को संस्कृति मंत्री (Culture Secretary) के पद पर बनाए रखा गया है। दोनों की नियुक्ति को ब्रिटेन की राजनीति में भारतीय मूल के समुदाय के बढ़ते प्रभाव का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
नई सरकार में कनिष्क नारायण को कृत्रिम मेधा और डिजिटल नवाचार से जुड़े मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। यह विभाग ब्रिटेन की भविष्य की तकनीकी रणनीति, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उभरती AI तकनीकों के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कनिष्क इससे पहले भी तकनीक और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े सरकारी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। माना जाता है कि AI क्षेत्र में उनके अनुभव और तकनीकी समझ को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कनिष्क नारायण का जन्म भारत के बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर में हुआ था। बचपन में ही उनका परिवार ब्रिटेन चला गया और लगभग 12 वर्ष की आयु में वे वेल्स की राजधानी कार्डिफ में बस गए।
ब्रिटेन में शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने तकनीक, वित्तीय सेवाओं (फिनटेक) और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। निजी क्षेत्र में लंबे अनुभव के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे तकनीकी नीतियों से जुड़े प्रमुख नेताओं में अपनी पहचान बनाई।
राजनीति में आने से पहले कनिष्क नारायण ने कई तकनीकी और वित्तीय कंपनियों के साथ कार्य किया। उन्होंने कृत्रिम मेधा (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म, फिनटेक समाधान और जलवायु तकनीक (Climate Tech) जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की।
उनका यह अनुभव अब सरकारी स्तर पर AI नीति निर्माण, डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी विकास को आगे बढ़ाने में उपयोगी माना जा रहा है।
वर्ष 2025 में तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार में कनिष्क नारायण को AI और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। उस दौरान उन्होंने डिजिटल सुरक्षा, कृत्रिम मेधा के जिम्मेदार उपयोग और उभरती तकनीकों के नियमन से जुड़े कई विषयों पर काम किया।
नई सरकार में उन्हें और अधिक व्यापक जिम्मेदारी मिलने को उनके बढ़ते राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
