एआर रहमान ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कहा ‘कम्युनल’, ऑस्कर विनर को नहीं मिल रहा काम, बोले- सब मिलीभगत

संगीतकार एआर रहमान के लिए 2025 काफी व्यस्त रहा और उन्होंने एल्बम ‘गांधी वार्ता’ से इसकी शानदार शुरुआत की है। नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ के इस साल के अंत में रिलीज होने के बाद यह रहमान सुर्खियों में आ जाएंगे। इस फिल्म में रहमान दिग्गज संगीतकार हंस जिमर के साथ काम कर रहे हैं।एआर रहमान का कहना है कि उनके पास काम कम आ रहा है, जिसका कारण उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को बताया है। उन्होंने पिछले आठ वर्षों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर सत्ता परिवर्तन और सांप्रदायिक भावना को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि यह सीधे तौर पर उनके सामने नहीं आई है। लेकिन वो अफवाहे सुनते रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं काम की तलाश में नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि काम मेरे पास आए, ईमानदारी से किए गए काम से ही मुझे कमाई हो। मुझे लगता है कि काम की तलाश में भटकना मेरे लिए अपशगुन है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें 1990 के दशक में अपने करियर की शुरुआत में हिंदी फिल्म फिल्म इंडस्ट्री में किसी तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा, तो रहमान ने कहा, ‘शायद मुझे इन सब बातों का पता नहीं था। शायद भगवान ने इन सब बातों को छुपा रखा था। लेकिन मुझे तो कभी ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ, पर शायद पिछले आठ वर्षों में सत्ता परिवर्तन हो चुका है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘आजकल जो लोग क्रिएटिव नहीं हैं, उनके पास फैसले लेने की पावर है, और यह शायद मिलीभगत रही हो, लेकिन मेरे सामने नहीं हुआ। मुझे कानाफूसी की तरह पता चला कि उन्होंने आपको बुक किया था, लेकिन कंपनी ने आगे बढ़कर अपने पांच संगीतकारों को काम पर रख लिया। मैंने कहा, ‘वाह, बढ़िया है, मुझे आराम करने का समय मिल गया, मैं अपने परिवार के साथ समय बिता सकता हूं।’

यूट्यूब चैनल पर एआर रहमान से पूछा गया कि क्या एल्बम बनाते समय उनकी धार्मिक मान्यताओं का कोई प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा, ‘मैंने एक ब्राह्मण स्कूल में पढ़ाई की है और हर साल हमारे यहां रामायण और महाभारत पढ़ी जाती थी, इसलिए मुझे कहानी का ज्ञान है। कहानी इस बारे में है कि एक व्यक्ति कितना गुणी होता है, ऊंचे आदर्श क्या होते हैं, और ऐसी ही कई बातें। लोग भले ही असहमत हों, लेकिन मैं इन सभी अच्छी बातों को महत्व देता हूं। पैगंबर ने कहा है कि ज्ञान अनमोल है, चाहे वह कहीं से भी मिले – एक राजा से, एक भिखारी से, एक अच्छे कर्म से या एक बुरे कर्म से। आपको चीजों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए।’

रहमान ने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि हमें छोटी सोच और स्वार्थ से ऊपर उठने की जरूरत है। क्योंकि जब हम ऊपर उठते हैं और तेजस्वी बनते हैं, तो हम उसी तेजस्वी का रूप धारण कर लेते हैं, और यह बहुत जरूरी है। मुझे इस पूरी बात पर गर्व है, क्योंकि यह भारत से पूरी दुनिया के लिए प्यार से भरा है। हंज जिमर यहूदी हैं, मैं मुसलमान हूं, और रामायण हिंदू धर्म का ग्रंथ है।’

उन्होंने फिल्म के संगीत के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘हमें कुछ पुरानी सोच को भूलना होगा, जैसे कि हमारी ये सोच कि, ‘रामायण को इस तरह दिखाया जाना चाहिए,’ लेकिन साथ ही संस्कृति के गुणों को भी दिखाना होगा। मैं डॉ. कुमार विश्वास के साथ काम कर रहा हूं, जो रामायण और हिंदी भाषा के मामले में एक विशेषज्ञ हैं, लगभग प्रोफेसर लेवल के। उनके शरीर का हर कण रामायण बोलता है। वे इस तरह के गाने लिखते हैं, और वे बहुत ही दयालु हैं। इसलिए हम सब मिलकर एंजॉय कर रहे हैं, और यह एक नया अनुभव है।’