मशहूर कॉमिक एक्टर असरानी का निधन
मशहूर एक्टर गोवर्धन असरानी का दीपावली के दिन यानी 20 अक्टूबर को निधन हो गया। 84 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। एक्टर को 4 दिन पहले भारतीय आरोग्य निधि अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद सांताक्रूज के शांतिनगर स्थित श्मशान में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
असरानी ने अपने एक्टिंग करियर में तकरीबन 350 फिल्मों में काम किया। इनमें शोले, अभिमान, चुपके-चुपके, छोटी सी बात और भूल भुलैया भी शामिल हैं। फिल्म शोले में ही उनका कालजयी डायलॉग है– ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’।
असरानी का जन्म जयपुर में एक मिडिल-क्लास, सिंधी हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता एक कारपेट की दुकान चलाते थे। असरानी की 4 बहनें और 3 भाई हैं- दो बड़े और एक छोटे। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान माली हालत के चलते पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था। ऐसे में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो, जयपुर में वॉइस आर्टिस्ट के रूप में भी काम किया।
कॉलेज के दिनों में ही वे थिएटर ग्रुप्स से जुड़े और स्टेज पर परफॉर्म करते रहे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक्टिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया। असरानी ने साल 1966 में ने भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे से एक्टिंग का कोर्स कंप्लीट किया। इसके बाद उन्हें हिंदी फिल्मों में पहला मौका 1967 में मिला। असरानी ने ‘हरे कांच की चूड़ियां’ फिल्म से डेब्यू किया। इस फिल्म में उन्होंने लीड एक्टर बिस्वजीत के मित्र का किरदार निभाया था।
इसके बाद पॉपुलर फिल्ममेकर ऋषिकेष मुखर्जी ने उन्हें 1969 की फिल्म सत्यकाम में एक रोल दिया, जिससे उन्हें पहचान मिल गई। फिर 1971 में रिलीज हुई फिल्म गुड्डी ने उन्हें कामयाब बना दिया। इसके साथ ही उन्हें लगातार फिल्मों में काम मिलने लगा।
