अटल प्रतिमा घोटाले में उप अभियंता निलंबित, बड़े जिम्मेदारों पर चुप्पी
कटघोरा के अटल परिसर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा में कथित फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सरकार ने पहला बड़ा एक्शन लिया है। कांस्य (ब्रॉन्ज) की जगह सीमेंट-कंक्रीट से प्रतिमा बनाने और लाखों रुपए की अनियमितता के आरोपों के बीच उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या करोड़ों की सरकारी योजनाओं में होने वाले घोटालों की तरह यह मामला भी सिर्फ एक अधिकारी के निलंबन तक ही सीमित कर दिया जाएगा?
संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास ने 31 जुलाई को जारी आदेश में उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को छत्तीसगढ़ नगर पालिका कर्मचारी नियम, 1968 के तहत निलंबित कर दिया। जांच रिपोर्ट में उन्हें निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता और लापरवाही का जिम्मेदार माना गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय दुर्ग क्षेत्रीय कार्यालय तय किया गया है और नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता भी मिलेगा।
संयुक्त संचालक, बिलासपुर की 29 जुलाई की जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं बनाई गई। प्रतिमा की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। पहली बारिश में ही उसकी परतें उखड़ने लगीं और कई हिस्सों में नुकसान दिखाई देने लगा। जांच में यह भी माना गया कि निर्माण कार्य की निगरानी में गंभीर लापरवाही हुई।
पूरा विवाद इसी आरोप से शुरू हुआ कि जिस प्रतिमा को कांस्य धातु से बनाया जाना था, उसे सीमेंट और कंक्रीट से तैयार कर केवल ब्रॉन्ज जैसा रंग चढ़ा दिया गया। बारिश होते ही रंग उतर गया और मूर्ति की असलियत सामने आ गई। इसके बाद करीब 13.60 से 14 लाख रुपए की लागत वाले इस काम में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप तेज हो गए।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या पूरे मामले की जिम्मेदारी केवल एक उप अभियंता पर डालकर फाइल बंद करने की तैयारी है? प्रतिमा निर्माण में स्वीकृति किसने दी, तकनीकी परीक्षण किसने किया, भुगतान किसके आदेश पर हुआ और गुणवत्ता प्रमाणित किस अधिकारी ने की? इन सवालों के जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं। ऐसे में सिर्फ निलंबन को कार्रवाई का अंत मान लेना कई सवाल खड़े करता है।
सरकारी निर्माण कार्यों में भुगतान कई स्तरों की मंजूरी के बाद होता है। टेंडर प्रक्रिया, माप पुस्तिका, गुणवत्ता परीक्षण और अंतिम भुगतान में कई अधिकारी शामिल रहते हैं। ऐसे में यदि जांच केवल एक अधिकारी तक सीमित रही तो बड़े जिम्मेदारों की भूमिका पर पर्दा पड़ने की आशंका भी बनी रहेगी।
नगरीय प्रशासन विभाग ने आदेश की प्रतियां संबंधित विभागों, कलेक्टरों और नगर निकायों को भेज दी हैं। लेकिन अब नजर इस बात पर है कि क्या सरकार केवल निलंबन तक सीमित रहेगी या फिर पूरे प्रतिमा निर्माण, भुगतान प्रक्रिया और कथित 14 लाख रुपए के घोटाले की विस्तृत जांच कर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर भी कार्रवाई करेगी।
