लू से भिखारी की मौत…भीषण-गर्मी में आंखों को खतरा, बिलासपुर में दोपहर में सन बर्न जैसे हालात

बिलासपुर में लू और हीट वेव के अलर्ट के बीच दोपहर में सूरज आग उगल रहा है। इससे सन बर्न के हालात बन गए हैं। शुक्रवार को लू लगने से एक बुजुर्ग भिखारी की मौत हो गई, वो दिन से बीमार था। जिले में पड़ रही गर्मी और तेज धूप का असर अब लोगों की आंखों पर भी दिखने लगा है। जिला अस्पताल और सिम्स के नेत्र रोग विभाग में आंखों की एलर्जी और संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर वर्नल केराटो कंजंक्टिवाइटिस (वीकेसी) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

जिले के साथ-साथ शहर में भी सूरज के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं, जिससे पूरा इलाका भीषण गर्मी की चपेट में है। बुधवार को अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक रहा। यह स्थिति पिछले कई दिनों से लगातार देखने को मिल रहा है।

इस बार प्रदेश के दूसरे शहरों की अपेक्षा बिलासपुर में गर्मी का रिकार्ड बन रहा है। सुबह 9 बजे के बाद से धूप की किरणें चूभ रही है। वहीं, दोपहर में सन बर्न के हालात हैं, जिससे घर से निकलना मुश्किल हो रहा है।

जिले के मस्तूरी थाना क्षेत्र में लू से ​भिखारी से मौत होने की आशंका है। ग्राम जोंधरा में 75 वर्षीय बुजुर्ग शुक्रवार की शाम को बाजार के पास मृत मिला। जूता दुकान के बाहर उसका शव पड़ा था।
बुजुर्ग दो महीने से जोंधरा में था और भिक्षा मांगकर जीवन यापन कर रहा था।

वह दिनभर इधर उधर घूमता था और रात को कहीं भी सो जाता था। पिछले दो दिन से वह बीमार था। भीषण गर्मी और लू के बीच भी वह बाजार के पास ही पड़ा था। सूचना मिलने पर मस्तूरी पुलिस पहुंची और उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी भेजा। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मॉर्च्युरी भेज दिया। मौत के वास्तविक कारणों का पता नहीं है, लेकिन हीट स्ट्रोक को ही इसकी वजह बताया जा रहा है।

उसके शरीर का पानी सूख चुका था। मस्तूरी टीआई कृष्ण चंद्र सिदार ने बताया कि, मृतक की तबीयत कुछ दिनों से खराब थी। उसका शरीर पूरी तरह सूख गया था, जिसके चलते शुक्रवार को उसकी मौत हो गई।

सिम्स के फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार का कहना है कि, लू के कारण होने वाली मौत की मुख्य वजह गंभीर डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की अधिक कमी और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर होता है। मौत के बाद केवल शव की जांच से डिहाइड्रेशन का सटीक पता लगाना संभव नहीं होता, क्योंकि हीटस्ट्रोक के कारण आंतरिक अंगों की संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता है।