बिहार : सम्राट चौधरी के गृहमंत्री बनते ही एक्शन शुरू… बेगूसराय में एनकाउंटर, गृहमंत्री ने कहा- सख्त कार्रवाई होगी
बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही पुलिस-प्रशासन ने अपना रुख सख्त कर लिया है. खासकर गृह विभाग उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंपे जाने के बाद पुलिस का पहला बड़ा एक्शन बेगूसराय में दिखा, जहां एसटीएफ और जिला पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में कुख्यात अपराधी शिवदत्त राय मुठभेड़ में घायल हो गया. शुक्रवार रात साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र के मल्हीपुर–शालिग्राम दियारा में हुई इस कार्रवाई को नई सरकार की कानून-व्यवस्था पर पहली बड़ी कसौटी माना जा रहा है. दरअसल, ‘संगठित अपराध’ की नई परिभाषा और पुलिस को दिए गए सख्त निर्देशों के बाद यह पहला बड़ा एक्शन है, जिसे लोग ‘योगी मॉडल’ से जोड़कर भी देख रहे हैं. एसटीएफ को सूचना मिली थी कि मल्हीपुर के आसपास अपराधियों का गिरोह मिलने वाला है जो बड़े पैमाने पर हथियारों की खरीद-बिक्री में शामिल है. जानकारी पुख्ता होने पर एसटीएफ और बेगूसराय पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की. जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, दो बाइकों पर सवार छह अपराधियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की. मुठभेड़ में तेघड़ा थाना क्षेत्र के बनहारा निवासी शिवदत्त राय (27) गोली लगने से घायल हो गया और गिर पड़ा, जबकि उसके अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए. घायल कुख्यात को तुरंत पुलिस कस्टडी में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
शिवदत्त राय, राजकिशोर राय का बेटा, पिछले दो वर्षों से फरार चल रहा था. वह बेगूसराय और आसपास के इलाकों में कई गंभीर मामलों में वांछित है. उस पर सबसे बड़ा आरोप 2 सितंबर 2022 को तेघड़ा के धनकौल पंचायत की सरपंच मीना देवी के घर हुई गोलीबारी का है. आधी रात में बदमाशों ने घर में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी. इस हमले में सरपंच के छोटे बेटे अवनीश कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी और बड़ा बेटा रजनीश भी गंभीर रूप से घायल हुआ था. पुलिस जांच में मामला लूटपाट का विरोध करने पर हत्या का निकला. इस घटना में शिवदत्त राय और उसके गिरोह के सरगना सहित कई अपराधियों पर नामजद एफआईआर हुई थी. इसके अलावा उस पर हथियार सप्लाई, रंगदारी, फायरिंग और जानलेवा हमलों के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस के लिए वह लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ था.
नई सरकार बनने के बाद गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस को साफ निर्देश दिए हैं कि अपराध चाहे छोटा हो या बड़ा-यदि वह संगठित ढांचे में चल रहा है, तो उसे संगठित अपराध की श्रेणी में लाकर उसी हिसाब से कार्रवाई हो. डीजीपी ने भी सभी जिलों को नजरिया बदलने का सख्त निर्देश दिया है. इसी नई नीति के तहत बेगूसराय में इस कार्रवाई को पुलिस का पहला बड़ा ‘एक्शन सिग्नल’ माना जा रहा है.
