‘दिल्ली-अंटार्कटिका कहीं भी जाकर प्रोटेस्ट करें’, धरने पर ममता को बीजेपी का जवाब
चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में जैसे ही सत्ता बदली, वैसे ही ‘दीदी’ यानी ममता बनर्जी की सियासत का रंग उतरने लगा. एक तरफ जहां टीएमसी नेता लगातार हमले झेल रहे हैं तो वहीं टीएमसी में ममता बनर्जी पर ‘अकेली’ पड़ती जा रही हैं. पार्टी में अंदरूनी रार और कलह खुलकर सामने आ गई है तो वहीं TMC को टूट से बचाने का संकट भी खड़ा हो गया है.
इसी बीच ममता बनर्जी ने टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमले के विरोध में सड़क पर उतरने का फैसला किया है. वह राज्य सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने जा रही हैं.
ममता ने शुभेंदु सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के बाद 2500 टीएमसी पार्टी कार्यालय तोड़ दिए गए. 10000 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. पुलिस टीएमसी विधायकों को घर से बाहर न निकलने की धमकी दे रही है. टीएमसी नेताओं पर हो रहे हमले के विरोध में ममता बनर्जी ने अब सड़क पर उतरने का फैसला किया है. ममता बनर्जी ने मंगलवार को दोपहर एक बजे रानी राशमनी रोड पर धरना देने के लिए पुलिस को आवेदन दिया था, लेकिन प्रशासन ने इजाजत नहीं दी. इसके बाद भी ममता बनर्जी धरना देने की जिद पर अड़ी हैं.
ममता बनर्जी ने कोलकाता से दिल्ली तक धरने देने का ऐलान कर दिया है. कोलकाता में धरना करने की तैयारी में है, लेकिन इजाजत नहीं मिली तो ममता दिल्ली में प्रदर्शन करेंगी. इस तरह ममता अब सड़क आंदोलन के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने की रणनीति पर काम कर रही है.
उधर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच मतभेद और असंतोष बढ़ रहा है तथा इन्हीं मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ममता बनर्जी विरोध-प्रदर्शनों का सहारा ले रही हैं.
दिलीप घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अब TMC के खिलाफ है और लोगों को विरोध प्रदर्शन करने से नहीं रोका जा सकता. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि ममता बनर्जी को प्रदर्शन करना है तो वह दिल्ली, अंटार्कटिका या रेगिस्तान कहीं भी जा सकती हैं.
उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में “पुलिस राज” और “जंगल राज” स्थापित किया है. घोष ने दावा किया कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे सुवेंदु अधिकारी को विभिन्न मुद्दों पर न्याय पाने के लिए 104 बार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की जनसभा के लिए भी भाजपा को अदालत से अनुमति लेनी पड़ी थी.
TMC में चल रहे कथित आंतरिक विवादों पर टिप्पणी करते हुए घोष ने कहा कि यह पार्टी का अंदरूनी मामला है. उन्होंने दिवंगत तृणमूल नेता सुब्रत मुखर्जी के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि TMC कोई राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक ट्रेन की तरह है, जिसमें लोग अपने हित के अनुसार आते-जाते रहते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा चुनाव के बाद दल बदलकर आए लोगों की पहचान कर रही है और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. दिलीप घोष ने कहा कि अभी TMC के लिए हमारे दरवाजे बंद हैं. Anti incumbency के खिलाफ हम जनता के बीच गए. चुनाव के नतीजे आने के बाद जितने लोग भगवाधारी हो गए हम उनको चिन्हित कर रहे है पार्टी से दूर करेंगे.
ममता बनर्जी की ओर से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और धरने के ऐलान के बीच एक और बड़ा मामला सामने आया है. पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के नामखाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इस वीडियो को X प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है. उन्होंने लिखा, ‘नामखाना में एक स्थानीय टीएमसी नेता को कथित तौर पर ग्रामीणों को पैसे लौटाते हुए देखा जा सकता है. आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत मकान दिलाने के नाम पर 45 लाभार्थियों से 5-5 हजार रुपये वसूले गए थे. विवाद बढ़ने और जांच की आशंका के बाद नेता पर यह रकम वापस करने का दबाव बना.’
उन्होंने लिखा कि, ‘अब जांच का डर इतना साफ दिखाई दे रहा है कि ऐसा लगता है जैसे स्थानीय नेता, कानून की पकड़ में आने से पहले ही, जल्दबाज़ी में “कट मनी” (कमीशन के पैसे) लौटाने में जुट गए हैं. जब गरीबों से ज़बरदस्ती पैसे वसूलने वाले लोग सरेआम पैसे लौटाने लगते हैं, तो यह उनके मन का पछतावा नहीं होता, बल्कि यह उनका डर होता है.
