अचानक इस देश में ब्लैकआउट से हाहाकार, अंधेरे में डूबे देश के 1.1 करोड़ लोग
क्यूबा का संकट कम नहीं हो रहा है. ये देश एक बार फिर अंधेरे की चपेट में आ गया है. अचानक सोमवार को क्यूबा की राजधानी हवाना समेत पूरे देश में बिजली गुल हो गई,चारों तरफ अंधेरा परस गया. कई घंटों तक बिजली सप्लाई ठप होने से घरों, अस्पतालों और परिवहन सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा है. सोमवार को देशव्यापी ब्लैकआउट की वजह से करीब 1.1 करोड़ लोग अंधेरे में डूब गए. दरअसल, क्यूबा ने ऊर्जा मंत्रालय ने सोशल मीडिया जानकारी देते हुए बताया कि देश के बिजली ग्रिड में पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया है, जिससे देश के तमाम इलाकों से बिजली गायब हो गई, अधिकतर घरों में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. हालांकि ये नहीं बताया कि किस कारण से बिजली सप्लाई ठप हो गई है. मंत्रालय का कहना है कि इस बड़े ब्लैकआउट के कारणों की जांच की जा रही है.
क्यूबा आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, और पहले से ही यहां ऊर्जा व्यवस्था कमजोर स्थिति में है, देश के अधिकतर बिजली प्लांट पुराने ढांचे पर आधारित हैं, जो कि नियमित रखरखाव नहीं होने से ऐसी समस्या आ रही है. ऐसे में तेल की आपूर्ति बाधित होने से संकट और गहरा गया है. क्यूबा पर अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंध लगा रखा है. जिससे हाल के वर्षों में ऊर्जा संकट इसकी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है. अमेरिका की नीति के कारण क्यूबा को अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूरा तेल नहीं मिल पा रहा है, यही बड़ा कारण है कि बिजली उत्पादन पर असर पड़ रहा है. बिजली गुल हो जाने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को पानी की सप्लाई, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं में भी बाधा झेलनी पड़ रही है. छोटे व्यवसाय और उद्योग भी ठप पड़ गए हैं, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है.
हालांकि सरकार ने आपातकालीन उपायों के तहत वैकल्पिक एनर्जी सोर्स और सीमित आपूर्ति के जरिए हालात संभालने की कोशिश शुरू की है. इस बीच खबर ये है कि जब तक देश में ईंधन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होती, तब तक ब्लैकआउट का खतरा बना रहेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार रात तक हवाना के करीब 5 प्रतिशत हिस्से में बिजली बहाल कर दी गई, जिससे लगभग 42 हजार उपभोक्ताओं को राहत मिली. लेकिन अभी भी देश के बड़े हिस्से में अंधेरा कायम है.
