ओवन की तरह उबल रहा है ब्रिटेन!

इस समय पूरा पश्चिमी यूरोप और ब्रिटेन भीषण गर्मी और खतरनाक हीटवेव की चपेट में हैं. हालात इतने खराब हैं कि स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं और कई लोगों की जान भी जा चुकी है. हैरान करने वाली बात यह है कि ब्रिटेन में तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास है. अब भारत के लोग सोच रहे होंगे कि हमारे यहां तो गर्मियों में तापमान आराम से 45 डिग्री के पार चला जाता है, फिर अंग्रेज 35 डिग्री में ही क्यों उबल रहे हैं? आखिर क्यों ब्रिटेन की 35 डिग्री की गर्मी भारत की 45 डिग्री की चुभती धूप से भी ज्यादा जानलेवा और दमघोंटू महसूस हो रही है? इसका जवाब किसी जादू में नहीं, बल्कि मौसम के विज्ञान और वहां के घरों की बनावट में छिपा है.

ब्रिटेन चारों तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है, जिसके कारण वहां की हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी बहुत ज्यादा होती है. जब भारत में सूखी गर्मी पड़ती है, तो हमारे शरीर से निकलने वाला पसीना हवा में तुरंत सूख जाता है और हमें ठंडक मिलती है. लेकिन ब्रिटेन में हवा पहले से ही नमी से भरी होती है, जिससे पसीना सूख ही नहीं पाता. जब पसीना नहीं सूखता, तो शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर देता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां का ‘वेट-बल्ब’ तापमान 25 डिग्री के पास पहुंच रहा है, जो इंसानी शरीर के दिल और फेफड़ों पर भारी दबाव डालता है.

भारत में घरों को इस तरह बनाया जाता है कि उनमें वेंटिलेशन अच्छा हो, दीवारें मोटी हों और धूप सीधे अंदर न आए. लेकिन ब्रिटेन के घर इसके बिल्कुल उलट हैं. वहां की इमारतें, कंक्रीट के ब्लॉक्स और ईंटें सर्दियों की कड़ाके की ठंड को रोकने के लिए बनाई जाती हैं. ये घर बाहर की गर्मी को अंदर खींच लेते हैं और रात के समय उसे धीरे-धीरे बाहर छोड़ते हैं. एयर कंडीशनर (AC) न होने के कारण ये घर रात के समय किसी ‘थर्मल बैटरी’ या ओवन की तरह तपते रहते हैं, जिससे लोगों को सोने का मौका भी नहीं मिलता.

भारत में गर्मी अचानक नहीं आती. मार्च से लेकर मई-जून तक तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है, जिससे हमारे शरीर, सड़कों और स्वास्थ्य प्रणालियों को इस मौसम में ढलने का पूरा समय मिल जाता है. लेकिन ब्रिटेन में मौसम ने अचानक पलटी मारी है. मई के महीने तक वहां रात में बर्फ जम रही थी और अचानक जून में तापमान 35 डिग्री तक पहुंच गया. इस अचानक आए बदलाव के लिए वहां के लोगों का शरीर तैयार नहीं था.

जून और जुलाई के महीने में ब्रिटेन में सूरज बहुत देर से डूबता है. दिन लंबे होने के कारण सड़कों, कंक्रीट की इमारतों और डामर को धूप सोखने के लिए कई एक्स्ट्रा घंटे मिल जाते हैं. सूरज डूबने के बाद भी यह गर्मी हवा में घुलती रहती है. जब रात का तापमान 20 डिग्री से ऊपर बना रहता है, तो उसे ‘ट्रॉपिकल नाइट’ कहा जाता है. ऐसी रातों में इंसानी शरीर दिनभर की थकान और गर्मी से खुद को रिकवर नहीं कर पाता है. यही वजह है कि थर्मामीटर पर भले ही आंकड़ा कम हो, लेकिन ब्रिटेन की यह गर्मी जानलेवा साबित हो रही है.