सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने को कैबिनेट की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (05 मई) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई. कैबिनेट की इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. इसी दौरान कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या में इजाफा को अपनी मंजूरी दी है. अब सुप्रीम कोर्ट में 33 की जगह 38 न्यायाधीश होंगे. इसकी मंजूरी कैबिनेट ने दे दी है. करीब 6 साल बाद यह फैसला लिया गया है. साल 2019 में इसे बढ़ा कर 31 से 33 किया गया था. दरअसल, सरकार की ओर से कहा गया कि इसका मकसद सुप्रीम कोर्ट को और मजबूत करना एवं न्याय प्रक्रिया को तेज करना है. रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं. कैबिनेट के फैसले की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है. उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में फिलहाल 33 न्यायाधीश हैं और एक मुख्य न्यायाधीश हैं.केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगामी संसद के सत्र में इससे संबंधित एक विधेयक पेश किया जाएगा. इसके पारित होने के बाद जजों की संख्या 38 हो जाएगी. सरकार के इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को निपटाने में आसानी होगी. सुप्रीम कोर्ट मे इस समय बड़ी संख्या में लंबित मामले हैं, जिससे कई बार न्यायिक प्रक्रिया में देरी का सामना करना पड़ता है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या अधिनियम 1956 के मूल रूप से न्यायाधीश को छोड़कर 10 न्यायाधीशों का प्रावधान था. 1960 में इसको 13 फिर 17 किया गया. वहीं, साल 1986 में जजों की संख्या 25 हो गई और 2009 में इसे 30 कर दिया गया. कैबिनेट के फैसले के बाद न्यायपालिका को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उठाया गया है.

गौरतलब है कि भारत के संविधान में सुप्रीम कोर्ट की कुल संख्या तय नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत चीफ जस्टिस के अलावा अन्य जजों की संख्या संसद से तय किया जाता है. समय-समय पर बढ़ती मुकदमों की संख्या को देखते हुए इसमें कई बार बदलाव किया जाता रहा है.