कैमरा ऐसा कि जमीन की एक-एक चीज दिखेगी साफ! भारत और साउथ कोरिया मिलकर बना रहे सैटेलाइट
भारतीय स्टार्टअप कंपनी Bellatrix Aerospace ने दक्षिण कोरिया की स्पेस टेक्नोलॉजी फर्म TelePIX के साथ एक बड़ा हाथ मिलाया है. दोनों कंपनियों ने दक्षिण कोरिया के डेजॉन शहर में एक MoU पर साइन किया है. अब दोनों कंपनियां मिलकर एक नेक्स्ट-जेनरेशन Very Low Earth Orbit यानी VLEO सैटेलाइट तैयार करेंगी. यह सैटेलाइट पृथ्वी की बहुत ही साफ और अल्ट्रा-हाई- रिजॉल्यूशन इमेज क्लिक कर सकेगी. दोनों देशों के बीच इस पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्य डिफेंस, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण की निगरानी को और मजबूत करना है. इस मिशन को साल 2028 तक लॉन्च करने का लक्ष्य तय किया गया है.
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर ये VLEO सैटेलाइटक्या होते हैं. तो इसका जवाब है कि LEO जो होता है, वह काफी ऊंचाई पर काम करते हैं, लेकिन VLEO सैटेलाइट पृथ्वी की सतह से महज 150 से 250 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरेगा. धरती से बहुत पास होने के कारण से यह सैटेलाइट बाकी सैटेलाइट्स के मुकाबले कहीं ज्यादा साफ, सटीक और डिटेल तस्वीरें कैप्चर कर सकेगा.
इस प्रोजेक्ट में दोनों कंपनियों की सबसे बेहतरीन तकनीक का इस्तेमाल करेंगी. भारत की Bellatrix Aerospace कंपनी इस सैटेलाइट के लिए सैटेलाइट बस और अपना खास Air-Breathing Electric Propulsion सिस्टम देगी. यह प्रोपल्शन सिस्टम भारी-भरकम ईंधन ले जाने के बजाय ऊपरी वायुमंडल से ही ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के कणों को लेकर, उन्हें कंप्रेस करता है और फिर सोलर पैनल की बिजली से चार्ज करके थ्रस्ट यानी रफ्तार पैदा करता है.
वहीं साउथ कोरिया की कंपनी TelePIX इसमें अपना हाई-रिजॉल्यूशन ऑप्टिकल इमेजिंग पेलोड Chouette लगाएगी और सिस्टम इंटीग्रेशन में मदद करेगी. इतनी कम ऊंचाई पर किसी सैटेलाइट का उड़ना आसान नहीं होता है. इतनी कम ऊंचाई पर हवा का खिंचाव सबसे बड़ी समस्या होता है, जो सैटेलाइट को नीचे खींचता है. Bellatrix की प्रोपल्शन तकनीक इसी खिंचाव को मात देकर सैटेलाइट को लंबे समय तक अंतरिक्ष में बनाए रखेगी.
TelePIX के अनुसार उनका Chouette पेलोड खास तौर पर VLEO मिशन के लिए तैयार किया गया है. इसका वाइड-स्वाथ ऑप्टिकल इमेजिंग सिस्टम फिलहाल काम कर रहे दूसरे सैटेलाइट्स की तुलना में दोगुने से ज्यादा इलाके पर नजर बनाए रख सकता है. साथ ही, तस्वीरों की क्वालिटी को और शानदार बनाने के लिए इसमें AI बेस्ड इमेज-प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.
इस प्रोजेक्ट के सफल हो जाने पर भारत को बड़ा फायदा होगा. एक तरफ पड़ोसी मुल्की चीन और पाकिस्तान पर बड़े स्तर पर निगरानी हो सकेगी, तो वहीं मौसम का और सटीक अंदाजा मिल सकेगा.
