2 कैरेट सोने से जलमहल की नक्काशी, 300 साल पुरानी खान से निकले मार्बल से दिया रॉयल लुक

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जयपुर में मानसागर झील में बने जलमहल में 22 कैरेट सोने से नक्काशी की गई है। आनंद महल तिबारी में गोल्ड से नक्काशी के साथ ही कुंदन और मीनाकारी करके नया लुक दिया गया है। 288 साल पुराने जलमहल को लोटस थीम पर रिनोवेट किया गया है। जलमहल को 135 करोड़ रुपए खर्च कर फिर से रॉयल लुक दिया गया है।

नवरत्न कोठारी बताते हैं कि ये उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है। कोठारी ने इस प्रोजेक्ट के लिए देश-विदेश के बेस्ट लोगों को हायर किया है और काम करवाया है। इस प्रोजेक्ट के लिए वे खुद भी फील्ड में जाते थे और काम करवाते थे। कोठारी का विजन रहा है कि जलमहल को उसी अवतार में वापस लेकर आए जिस तरह वो सालों पहले बना था। इनके बेटे संजय कोठारी भी इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

जलमहल अब अपने पुराने रॉयल हेरिटेज लुक के नए अवतार में नजर आने लगा है। रिनोवेशन क बाद इसकी चमक देखते ही बनती है।

ऐसा बताया जाता है की जलमहल की छत पर कभी शाही उद्यान हुआ करता था। लंबे समय से ध्यान न देने के कारण यहां जंगली घास उग आई थी। इंडियन गार्डन एक्सपर्ट मिशेल एके काइट्स ने यहां फिर से शाही बाग बनवाया है।

आनंद महल तिबारी पर 22 कैरेट गोल्ड से नक्काशी के साथ-साथ कुंदन और मीनाकारी भी की गई है।

इस गार्डन को लोटस थीम दी गई है। चार हेरिटेज डिवीजन के साथ जैस्मिन गार्डन का चार बाग ब्यूटीफुली कार्विंग करके बनाया है। चमेली बाग की खूबसूरत रेलिंग का डिजाइन सिटी पैलेस के चंद्र-महल गार्डन में मौजूद कमल बुर्ज मंडल से लिया गया है। चमेली बाग में सभी फूल व्हाइट हैं। यहां की हवा में चमेली, कमल और फ्रेंजीपानी फूलों की खुशबू आती हैं।

लोटस थीम पर गार्डन को सजाया गया है। इसकी शानदार लाइटिंग काफी आकर्षक है।

जलमहल के बगीचे के चारों तरफ व्हाइट मार्बल की छतरियां और तिबारी हैं। यहां सबसे भव्य आनंद महल तिबारी है। यहां का आर्ट वर्क जयपुर के सिटी पैलेस के सिलेह खाना के आर्ट से इंस्पायर है।

जलमहल से बर्ड की कई वैरायटी और अरावली पर्वतमाला की खूबसूरत वादियों को देखना किसी एडवेंचर से कम नहीं है।

रास बिहारी तिबारी राजस्थानी आर्ट पर बेस्ड है। यह सिटी पैलेस के प्रीतम चौक के ग्राफ्टी से इंस्पायर कृष्ण की रास लीला को दर्शाती है। इस तिबारी का पूरा काम आर्टिस्ट ने लेट कर किया था। तिबारियों के कलश पर भी सोने की परत चढ़ाई गई हैं। जिसे समय-समय पर मेंटेन किया जाएगा है। अभी बची हुई दो तिबारी पर काम बाकी है। जो जल्द ही शुरू होगा।

जलमहल के आस-पास बड़े पैमाने पर सफाई की गई। प्रदूषित हिस्से को हटाया तो पानी ज्यादा गहरा हुआ। इससे अब यहां बोटिंग करना बहुत आसान हो सकता है।

जलमहल में मार्बल और बलुआ पत्थर का काम आमेर और जयपुर की राजपूती आर्किटेचर से इंस्पायर है। रिनोवेशन के लिए मास्टर मोहन की देखरेख में जयपुर के आंधी स्थित उसी 300 साल पुरानी मार्बल की खान से मार्बल लाया गया, जो कभी महल को बनाने के समय काम लिया गया था।

प्रोजेक्ट को ड्राइव कर रहे आर्किटेक्ट राजीव लुंकड़ ने बताया कि देशभर के नामचीन एक्सपर्ट और कलाकारों की मदद से जयपुर के इस ड्रीम को साकार किया।

जलमहल को बेहतर स्थिति में लाने के लिए आर्किटेक्चर कंजर्वेशन में देश के लीडिंग एक्सपर्ट और मेहरानगढ़ किले पर किए कार्य के लिए अवॉर्डेड प्रोफेसर कुलभूषण जैन की गाइडेंस ली गई। उन्होंने महीनों तक रिसर्च से पारंपरिक प्लास्टर बनाने की तकनीक खोजी। इस तकनीक में चूना, रेत और सुरखी का मिक्सचर बनाया गया। इसे लगाने के लिए ट्रेंड कारीगरों को शामिल किया गया।

यहां सिद्धार्थ दास स्टूडियो ने पांच थीम पर आर्ट गैलरी की सीरीज बनाई हैं। इसमें मानसून के शुरुआत में जलमहल और इसकी आस-पास के लैंडस्केप को 34 फीट लंबे पेंटिंग में दिखाया गया है। इन पेंटिंग में जयपुर के हेरिटेज को स्पेशल फोकस किया गया है।