पाकिस्तान में बड़ा बदलाव, मुस्लिम मोहल्लों को फिर मिले हिंदू नाम, लाहौर में लौट रही पुरानी पहचान
पाकिस्तान के लाहौर शहर में इन दिनों एक खास पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां कई पुराने मोहल्लों और सड़कों के नाम बदलकर उन्हें फिर से उनके पुराने हिंदू नाम दिए जा रहे हैं। लंबे समय से जिन जगहों को मुस्लिम नामों से जाना जाता था, अब उन्हें उनकी ऐतिहासिक पहचान लौटाने की कोशिश हो रही है। इस फैसले की चर्चा सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत में भी हो रही है। बताया जा रहा है कि यह पहल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की देखरेख में शुरू की गई है। इसका मकसद लाहौर के पुराने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को बचाना है। इस योजना को “लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल” नाम दिया गया है। इसके तहत शहर के पुराने इलाकों की पहचान को फिर से सामने लाने की कोशिश की जा रही है। लाहौर कभी हिंदू और सिख संस्कृति का बड़ा केंद्र माना जाता था। विभाजन से पहले यहां बड़ी संख्या में हिंदू और सिख परिवार रहते थे। उस समय कई मोहल्लों और चौकों के नाम भी हिंदू संस्कृति से जुड़े हुए थे। लेकिन 1990 के बाद इन नामों को बदलकर इस्लामी नाम रख दिए गए थे।
अब करीब 30 साल बाद कई पुराने नाम फिर से वापस लाए जा रहे हैं। इस्लामपुरा को कृष्णनगर, सुन्नतनगर को संतनगर और मौलाना जफर चौक को लक्ष्मी चौक कहा जा रहा है। वहीं, बाबरी मस्जिद चौक का नाम फिर से जैन मंदिर चौक कर दिया गया है। इसके अलावा, अंग्रेजों के समय के कुछ पुराने सड़कों के नाम भी दोबारा रखे गए हैं।इस फैसले को लेकर सबसे खास बात यह है कि पाकिस्तान में इसका ज्यादा विरोध देखने को नहीं मिला। आम तौर पर ऐसे मामलों में कट्टरपंथी संगठन विरोध करते हैं, लेकिन इस बार माहौल शांत बताया जा रहा है।
