नए साल पर चीन का एतिहासिक फैसला- बदल दिया मनी सिस्टम.. .क्या होगा डॉलर का ?
नया साल शुरू होते ही चीन ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने दुनिया के मनी सिस्टम को लेकर नई बहस छेड़ दी है. चीन अब अपने डिजिटल युआन को सिर्फ पेमेंट के साधन से आगे ले जाकर बैंक डिपॉजिट जैसा बना रहा है. यानी डिजिटल वॉलेट में रखा पैसा ब्याज भी देगा और सुरक्षित भी रहेगा. अब तक आपने डिजिटल पैसा मतलब UPI, Paytm, Alipay या WeChat Pay जैसे ऐप्स को समझा होगा. इनमें पैसा बस लेन-देन के लिए होता है. न उस पर ब्याज मिलता है, न वो बैंक में जमा पैसे जैसा माना जाता है. लेकिन चीन ने इसी सोच को बदल दिया है. सबसे अहम बात यह है कि इस डिजिटल युआन वॉलेट को अब सीधे बैंकों की बैलेंस शीट पर रखा जाएगा. मतलब यह पैसा बैंक की जिम्मेदारी होगा. यही वजह है कि इसमें डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर भी मिलेगा. जनवरी 2026 से चीन का डिजिटल युआन यानी e-CNY एक नए रूप में सामने आने वाला है. अब अगर किसी व्यक्ति के डिजिटल युआन वॉलेट में पैसा रखा है, तो उस पर ब्याज मिलेगा. यानी यह पैसा सिर्फ खर्च करने के लिए नहीं रहेगा, बल्कि बैंक में जमा पैसे की तरह काम करेगा. इतना ही नहीं, इस पैसे पर डिपॉजिट इंश्योरेंस जैसा सुरक्षा कवच भी होगा, जैसा सामान्य बैंक खातों में होता है.
आपके मोबाइल वॉलेट में 10,000 युआन पड़े हैं. पहले यह पैसा सिर्फ ट्रांजैक्शन के काम आता था. अब वही पैसा बैंक अकाउंट की तरह सुरक्षित भी रहेगा और धीरे-धीरे बढ़ेगा भी. यानी नकदी और बैंक डिपॉजिट के बीच का फर्क लगभग खत्म हो जाएगा. यहां यह समझना बहुत जरूरी है कि डिजिटल युआन कोई क्रिप्टोकरेंसी नहीं है. यह बिटकॉइन जैसा जोखिम भरा या अनियमित सिस्टम नहीं है. यह पूरी तरह चीन की सॉवरेन करेंसी है, जिसे उसका केंद्रीय बैंक जारी करता है. फर्क बस इतना है कि यह डिजिटल, प्रोग्रामेबल और अब ब्याज देने वाला बन रहा है. इस फैसले का एक और बड़ा असर पेमेंट सिस्टम पर पड़ेगा. अभी तक चीन में डिजिटल भुगतान का कंट्रोल काफी हद तक प्राइवेट कंपनियों जैसे Alipay और WeChat Pay के पास रहा है. लेकिन अब डिजिटल पैसे का असली हाईवे सीधे चीन का केंद्रीय बैंक और सरकारी-निजी बैंक मिलकर बनाएंगे. यानी पैसा किस रास्ते से चलेगा, इस पर सरकार की पकड़ और मजबूत होगी. अभी इसका इस्तेमाल सरकारी भुगतान, सब्सिडी, मेट्रो टिकट और कुछ शहरों की सेवाओं तक सीमित है. लेकिन अब इसे लोन, सप्लाई चेन फाइनेंस और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट सेटलमेंट में भी इस्तेमाल किया जाएगा.
असल में चीन एक नया सॉवरेन मनी रेल बना रहा है. यानी ऐसा डिजिटल सिस्टम, जो अमेरिकी डॉलर पर निर्भर नहीं होगा. अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए चीन ने हांगकांग को टेस्टिंग ग्राउंड बनाया है. वहां लोग डिजिटल युआन डाउनलोड करके पेमेंट कर सकेंगे. इसके अलावा चीन, हांगकांग, थाईलैंड और यूएई मिलकर एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के भुगतान में डिजिटल युआन का इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं. अगर भविष्य में ज्यादा देश इस सिस्टम से जुड़ते हैं, तो डॉलर पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है. हालांकि डॉलर की ताकत रातों-रात खत्म नहीं होगी, लेकिन चीन ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अपने पैसे का सिस्टम खुद कंट्रोल करना चाहता है. बड़ी तस्वीर में देखें तो यह फैसला सिर्फ टेक्नोलॉजी का नहीं, बल्कि ताकत का है. पैसा किसका चलेगा, किस सिस्टम से चलेगा और किस नियम पर चलेगा – चीन अब इसका जवाब खुद लिखने की कोशिश कर रहा है. और यही वजह है कि दुनिया भर की नजर इस फैसले पर टिकी हुई है.
आंकड़े बताते हैं कि नवंबर 2025 तक डिजिटल युआन से करीब 3.48 अरब ट्रांजैक्शन हो चुके हैं. कुल लेनदेन की रकम करीब 16 ट्रिलियन युआन के आसपास पहुंच चुकी है. फिलहाल इसका इस्तेमाल सरकारी भुगतान, सब्सिडी, मेट्रो टिकट और कुछ चुनिंदा सेवाओं में ज्यादा हो रहा है.
नई व्यवस्था के बाद डिजिटल युआन का इस्तेमाल और बढ़ेगा. इससे लोन दिए जा सकेंगे, सप्लाई चेन फाइनेंसिंग होगी और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए अपने-आप पेमेंट सेटलमेंट होगा. यानी पैसा तय शर्तों के हिसाब से खुद ट्रांसफर हो जाएगा, बिना किसी इंसानी दखल के.
चीन की नजर सिर्फ अपने देश तक सीमित नहीं है. अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए हांगकांग को टेस्टिंग ग्राउंड बनाया गया है. वहां के लोग डिजिटल युआन डाउनलोड कर पेमेंट कर सकेंगे. इसके अलावा चीन, हांगकांग, थाईलैंड और यूएई मिलकर एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहे हैं, जिसमें एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के भुगतान डिजिटल युआन से हो सकें.
