NCERT किताब में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर पर CJI का एक्शन, कहा- बदनाम करने की इजाजत नहीं
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने NCERT की 8वीं कक्षा की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का चैप्टर शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई है। CJI ने कहा- किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। बुधवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में यह मामला सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने उठाया था।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा- मुझे इसकी पूरी जानकारी है। यह पूरे ज्यूडीशियल इंस्टीट्यूशन के लिए चिंता की बात है। यह सोचा-समझा कदम लग रहा है। मैं किसी को भी, चाहे वे कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हों, इंस्टीट्यूशन को बदनाम नहीं करने दूंगा। मैं इस मामले पर खुद नोटिस ले रहा हूं।
NCERT ने 23 फरवरी को जारी नई टेक्स्टबुक ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ में ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ टॉपिक के अंदर ज्यूडिशियरी में करप्शन का टॉपिक जोड़ा है। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी है।
सोशल साइंस की इस किताब में लिखा गया है- ‘Justice delayed is justice denied’, यानी इंसाफ में देरी नाइंसाफी की तरह है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है।
सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक एम सिंघवी ने CJI की बेंच के सामने कहा- बच्चों को ज्यूडिशियरी में करप्शन का सब्जेक्ट ऐसे पढ़ाया जा रहा है जैसे यह कहीं और, किसी और इंस्टीट्यूशन में है ही नहीं। यह चिंता का विषय है। हम यहां बार काउंसिल की चिंता लेकर आए हैं। दोनों वकीलों ने कहा, “किताब में ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्स वगैरह को छोड़ दिया है। दूसरे सेक्टर्स पर एक शब्द भी नहीं। वे ऐसे पढ़ा रहे हैं जैसे यह सिर्फ़ इसी इंस्टीट्यूशन में है।”
जवाब में CJI ने कहा, “प्लीज थोड़ा इंतजार करें। मुझे बार और बेंच दोनों से बहुत सारे कॉल, मैसेज आ रहे हैं। सभी हाईकोर्ट के जज समेत सिस्टम का हर स्टेकहोल्डर परेशान है। मैं इस मामले को खुद देखूंगा। कानून अपना काम करेगा।”
बेंच में शामिल जस्टिस बागची ने भी कहा कि यह किताब बेसिक स्ट्रक्चर के ही खिलाफ लगती है।
