CJP ने किया जंतर-मंतर से धरना खत्म करने का ऐलान, सरकार के साथ तीनों मांगों पर बनी स​हमति

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की रक्षा करने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे व्यापक छात्र आंदोलन का फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है. मोदी सरकार में किसी वरिष्ठ मंत्री का लंबे समय तक चले जन आंदोलन और राजनीतिक दबाव के बीच इस्तीफा देना बेहद दुर्लभ माना जा रहा है.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही थी. तीसरे दौर की वार्ता से कुछ घंटे पहले प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने इस्तीफे की घोषणा की. इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनके लिए गैर-समझौतावादी (Non-negotiable) मुद्दा है. धर्मेंद्र प्रधान के लंबे सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई.

यही वह स्थान है, जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया था और आंदोलन का केंद्र बना हुआ था. सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है, उन्हें पद से हटाया नहीं गया. इससे संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार उन्हें सम्मानजनक विदाई देना चाहती थी. ओडिशा से आने वाले भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान पहली बार 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने थे और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद उन्हें दोबारा इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई.

उधर, आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कैबिनेट ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है. प्रस्तावित संशोधन के तहत संगठित पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. वहीं 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों से जुड़ी घटनाएं भी लगातार चर्चा में बनी हुई हैं. आंदोलन, सरकार के फैसलों, बैठकों और जंतर-मंतर से जुड़े हर बड़े अपडेट के लिए इस लाइव ब्लॉग के साथ जुड़े रहिए.

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ जितेंद्र सिंह के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आंदोलन शुरू होने से पहले उनकी तीन प्रमुख मांगें थीं. इनमें से पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है. उन्होंने कहा, ‘आज कुछ देर पहले धर्मेंद्र प्रधान जी ने इस्तीफा दे दिया. हमारी पहली मांग मान ली गई है.’ सौरव दास ने कहा कि दूसरी मांग आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की थी. उन्होंने बताया कि सरकार ने इस मांग पर भी सहमति जताई है. उन्होंने कहा, ‘जिन राज्यों में बीजेपी या उसके गठबंधन की सरकारें हैं वहां छात्र आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी. साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी की टीम के सदस्यों के खिलाफ भी किसी तरह का एक्शन नहीं होगा.’ आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार मंगलवार तक अपनी गारंटी लिखित रूप में दे देगी. उन्होंने बताया कि प्रदर्शन के दौरान घायल लोगों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग पर भी सहमति बन गई है. उन्होंने कहा कि सरकार ने हमारी सभी प्रमुख मांगों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है, इसलिए हम आंदोलन वापस लेने का ऐलान करते हैं. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि आंदोलनकारियों ने चार सूत्रीय लिखित मसौदा सरकार को सौंपा था. उन्होंने कहा कि इसमें सभी राज्यों में दर्ज एफआईआर वापस लेने, नियमों के तहत अधिकतम मुआवजा देने और शिक्षा सुधारों को लेकर आंदोलनकारियों द्वारा दिए गए चार्टर का अध्ययन करने तथा उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है. बैठक के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने आधिकारिक तौर पर आंदोलन वापस लेने का ऐलान करते हुए कहा, हम अपना आंदोलन वापस लेते हैं.