यहां बिकता है कोयले-सा काला लहसुन, महंगे दाम में खरीद रहे लोग!

क्या लहसुन भी कभी काला होता है? जब भारत में लहसुन काला पड़ जाता है तो ज्यादातर घरों में उसे तुरंत कचरे में फेंक दिया जाता है. लोग सोचते हैं कि यह सड़ गया है और इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. लेकिन यही गलतफहमी आपको एक शक्तिशाली सुपरफूड से दूर रख रही है.
यूरोप, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में यही काला लहसुन प्रीमियम प्रोडक्ट बनकर महंगे दामों पर बिकता है. एक छोटे पैकेट की कीमत सैकड़ों रुपये तक हो सकती है. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे जानते हुए खरीद रहे हैं. अगर आपको इसके बेनिफिट्स पता चलेंगे तो आप भी हैरान रह जाएंगे.

काला लहसुन कोई अलग पौधा नहीं है. यह सामान्य सफेद लहसुन को खास प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. पूरे लहसुन के गुच्छों को 60-90 डिग्री सेल्सियस तापमान और 70-90% नमी वाले माहौल में 3 से 8 हफ्तों तक रखा जाता है. इस दौरान माइलार्ड रिएक्शन होता है, जिससे लहसुन का रंग काला, बनावट नरम-चिपचिपी और स्वाद मीठा हो जाता है. इसमें तेज तीखापन और बदबू बिल्कुल नहीं रहती, जो सामान्य लहसुन की सबसे बड़ी समस्या है. भारत में लोग इसे सड़ा हुआ समझते हैं, जबकि एशिया के कई देशों में सदियों से इसका इस्तेमाल हो रहा है. अब यूरोपीय बाजार में यह हेल्थ फूड स्टोर्स, ऑर्गेनिक शॉप्स और हाई-एंड रेस्टोरेंट्स में बड़े पैमाने पर उपलब्ध है.

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार काले लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा सामान्य लहसुन से कहीं ज्यादा होती है. खासकर S-allyl cysteine (SAC) नामक कंपाउंड बढ़ जाता है, जो शरीर में आसानी से अवशोषित होता है. यह कंपाउंड सूजन कम करने, फ्री रेडिकल्स से लड़ने और सेल डैमेज रोकने में बेहद असरदार है. काले लहसुन का मुख्य फायदा है कि ये इम्यूनिटी बढ़ाता है. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण यह संक्रमण से लड़ने की क्षमता मजबूत करता है. इसके अलावा ये दिल की सेहत सुधारता है. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है. कई स्टडीज में पाया गया कि काला लहसुन LDL कोलेस्ट्रॉल कम कर HDL को बढ़ा सकता है. साथ ही ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी अहम भूमिका निभाता है. सामान्य लहसुन में एलिसिन ज्यादा होता है, लेकिन काले लहसुन में यह कम होकर अन्य ज्यादा स्थिर और प्रभावी कंपाउंड्स में बदल जाता है. स्वाद मीठा होने से रोजाना खाना भी आसान है.