छत्तीसगढ़ में बिजली संकट पर आयोग सख्त, पावर कंपनी के अधिकारियों को किया तलब, मांगी कटौती की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में महीनेभर से जारी बिजली संकट और लगातार हो रही कटौती को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के अधिकारियों को तलब कर बिजली की मांग और उपलब्धता की स्थिति, विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही कटौती तथा संकट से निपटने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की जानकारी मांगी है। मंगलवार को कंपनी के अधिकारियों ने आयोग के समक्ष स्थिति की जानकारी दी। बताया जा रहा है कि आयोग ने बुधवार को भी कंपनी के उच्चाधिकारियों को तलब किया है।
प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ने और उसके अनुरूप पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण उद्योगों सहित अन्य क्षेत्रों में कटौती की जा रही है। त्योहारी सीजन के दौरान बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है। दूसरी ओर, बिजली की बढ़ती जरूरत पूरी करने के लिए कंपनी प्रबंधन पीक आवर्स में बिजली एक्सचेंज से खरीद रहा है। हालांकि, देशभर में बिजली की मांग बढ़ने के कारण अधिक कीमत चुकाने के बावजूद जरूरत के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने में चुनौती बनी हुई है।
प्रदेश में लगातार हो रही बिजली कटौती के मामले में विद्युत नियामक आयोग ने पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी प्रबंधन को नोटिस जारी कर अधिकारियों को उपस्थित होने के निर्देश दिए। इसके बाद मंगलवार को कंपनी के अधिकारी आयोग के कार्यालय पहुंचे और बिजली आपूर्ति की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया।
आयोग ने अधिकारियों से बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर, कटौती की स्थिति तथा लोड मैनेजमेंट के लिए अपनाए जा रहे उपायों के बारे में जानकारी मांगी। साथ ही यह भी पूछा कि उद्योगों और अन्य क्षेत्रों में कितनी कटौती की जा रही है। यदि आने वाले दिनों में भी मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता कम रहती है, तो ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कंपनी ने क्या तैयारी की है।
आयोग की ओर से मांगी गई जानकारी का उद्देश्य बिजली संकट की वास्तविक स्थिति और आपूर्ति प्रबंधन के उपायों को समझना है। बुधवार को भी कंपनी के उच्चाधिकारियों को तलब किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, आयोग की ओर से आगे क्या निर्देश दिए जाते हैं, यह स्पष्ट होना बाकी है।
प्रदेश में पिछले एक महीने से बिजली की खपत बढ़ी हुई है। उमस भरे मौसम के कारण एयर कंडीशनर और कूलर के इस्तेमाल में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही कृषि पंपों के संचालन से भी बिजली की मांग पर दबाव बढ़ा है। नतीजतन, प्रदेश में बिजली की खपत अप्रैल-मई के स्तर के करीब पहुंच गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 6300 मेगावॉट तक पहुंच गई है। मांग के इस स्तर पर पहुंचने के बीच उपलब्ध बिजली से जरूरत पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने पर कंपनी को आपूर्ति प्रबंधन के लिए कटौती का सहारा लेना पड़ रहा है।
मंगलवार शाम छह बजे की स्थिति इस अंतर को स्पष्ट करती है। उस समय प्रदेश में 5161 मेगावॉट बिजली उपलब्ध थी, जबकि मांग 5541 मेगावॉट दर्ज की गई। यानी उस समय मांग और उपलब्धता के बीच 380 मेगावॉट का अंतर था।
यह आंकड़ा मंगलवार शाम छह बजे की स्थिति का है। पूरे दिन की मांग और उपलब्धता में समय के अनुसार बदलाव हो सकता है। खासकर पीक आवर्स में बिजली की जरूरत बढ़ने पर आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ते हैं। बिजली की कमी को पूरा करने के लिए पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पीक आवर्स में बिजली एक्सचेंज से खरीद कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जरूरत पड़ने पर बिजली की कीमत 10 रुपये प्रति यूनिट तक चुकाई जा रही है।
हालांकि, बिजली एक्सचेंज से खरीद के बावजूद पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना आसान नहीं है। बताया गया है कि देशभर में बिजली की मांग बढ़ने के कारण बाजार में उपलब्धता पर दबाव है। ऐसी स्थिति में अधिक कीमत पर भी जरूरत के अनुरूप बिजली मिलना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। पीक आवर्स में बिजली की मांग सामान्य समय की तुलना में अधिक होने पर कंपनी को अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करनी पड़ती है। यदि बाजार में पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं होती है, तो मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए लोड मैनेजमेंट करना पड़ता है। प्रदेश में जारी कटौती को इसी चुनौती के संदर्भ में देखा जा रहा है।
बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर का असर उद्योगों पर भी पड़ रहा है। महीनेभर से जारी कटौती के कारण औद्योगिक इकाइयों को बिजली आपूर्ति में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। त्योहारी सीजन में उत्पादन और कारोबार की गतिविधियां महत्वपूर्ण होने के कारण इस दौरान बिजली कटौती की समस्या उद्योगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
उद्योगों के अलावा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी अलग-अलग समय पर बिजली कटौती किए जाने की जानकारी है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में क्षेत्रवार कटौती की अवधि, प्रभावित औद्योगिक इकाइयों की संख्या और उपभोक्ताओं की श्रेणी के अनुसार कटौती का विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया गया है। आयोग ने कंपनी से इसी तरह की जानकारी मांगी है, ताकि बिजली संकट और उसके प्रबंधन की स्थिति स्पष्ट हो सके।
विद्युत नियामक आयोग ने कंपनी से केवल मौजूदा संकट की जानकारी ही नहीं मांगी, बल्कि आने वाले दिनों में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बना रहने की स्थिति में किए जाने वाले इंतजामों पर भी जवाब मांगा है। इसमें लोड मैनेजमेंट, कटौती की स्थिति और बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी शामिल है।
अब निगाहें आयोग के समक्ष कंपनी की ओर से रखे जाने वाले तथ्यों और आगे होने वाली कार्रवाई पर हैं। यदि मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता में सुधार नहीं होता है, तो आपूर्ति प्रबंधन की चुनौती बनी रह सकती है। ऐसे में आयोग द्वारा मांगी गई जानकारी से प्रदेश में बिजली संकट की स्थिति, कटौती के कारणों और उससे निपटने के लिए कंपनी की तैयारियों को समझने में मदद मिलेगी।
