8 करोड़ सालों से जिंदा है ये जीव, इंसान ने बस 10 साल में कर दिया बर्बाद!

धरती पर कई ऐसे जीव हैं जो लाखों-करोड़ों साल से बिना बदले जीवित है. इन्हें प्रकृति ने इतनी मजबूती दी है कि बड़े-बड़े शिकारी भी इन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाए. लेकिन इंसान का लालच इन प्राचीन जीवों को भी बर्बाद कर रहा है. ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है पैंगोलिन की. यह अनोखा जीव पिछले 8 करोड़ साल से धरती पर राज कर रहा था, लेकिन इंसानों ने सिर्फ 10 साल में इसे विलुप्त होने की कगार पर पहुंचा दिया है.
पैंगोलिन को ‘स्केली एंटईटर’ भी कहा जाता है. इसका पूरा शरीर मजबूत शल्कों (scales) से ढका होता है जो केराटिन से बने होते हैं. खतरे के समय यह गोले का रूप धारण कर लेता है. यही कारण है कि शेर, चीता, भालू या हाथी जैसे जानवर भी इसे आसानी से नहीं खा पाते. लाखों सालों से यह रणनीति इनकी सुरक्षा करती रही. लेकिन इंसान के सामने यह रक्षा बेकार साबित हुई.

चीन, वियतनाम और अन्य एशियाई देशों में पैंगोलिन की स्केल्स को पारंपरिक दवा में इस्तेमाल किया जाता है. इसके मांस को स्वादिष्ट माना जाता है. नतीजतन, दुनिया भर में पैंगोलिन सबसे ज्यादा तस्करी वाला जानवर बन गया है. CITES के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में हजारों पैंगोलिन पकड़े गए लेकिन इससे कहीं ज्यादा तस्करी हो रही है.

विश्व व्यापार में हर साल हजारों टन पैंगोलिन स्केल्स बरामद होती हैं. अफ्रीका से एशिया की ओर तस्करी का नेटवर्क बहुत सक्रिय है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2010 के बाद से पैंगोलिन की आबादी में 80% तक की गिरावट दर्ज की गई है. एशिया में कुछ प्रजातियां पहले ही विलुप्त हो चुकी हैं. अफ्रीकी प्रजातियां भी तेजी से खत्म हो रही हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि पैंगोलिन 80 मिलियन साल पुरानी प्रजाति है. डायनासोर काल से भी पहले यह धरती पर था. लेकिन इंसानी गतिविधियां, जंगलों की कटाई और अवैध शिकार ने इसे मिटा दिया.

पैंगोलिन पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं. ये चींटी और दीमक खाकर फसल की सुरक्षा करते हैं. अगर पैंगोलिन खत्म हो गए तो कीटों की संख्या बढ़ेगी जो कृषि के लिए नुकसानदायक साबित होगी. भारत में भी पैंगोलिन पाए जाते हैं. उत्तर-पूर्वी राज्य, पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य इलाकों में इनकी मौजूदगी है. भारतीय वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत पैंगोलिन को उच्चतम सुरक्षा दी गई है लेकिन तस्करी रुक नहीं रही है. भारत सरकार और वन विभाग ने पैंगोलिन संरक्षण के लिए कई अभियान शुरू किए हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी CITES ने सख्त नियम बनाए हैं. कई एनजीओ पैंगोलिन बचाने के लिए जागरूकता फैला रहे हैं. लेकिन मांग बनी हुई है तो आपूर्ति भी जारी है. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर अगले 5-10 साल में तस्करी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगा तो पैंगोलिन धरती से हमेशा के लिए गायब हो जाएंगे.