अजित पवार को श्रद्धांजलि देने उमड़ी भीड़, लोग बोले- उनके जैसा नेता फिर नहीं होगा

महाराष्ट्र की सियासत का एक बड़ा चेहरा बुधवार को हुए विमान हादसे में खामोश हो गया. आज गुरुवार सुबह जब उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव काटेवाड़ी लाया गया, तो पूरा इलाका शोक में डूब गया. गांव की गलियों से लेकर उनके आवास के बाहर तक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर आंख नम थी, हर गला रुंधा हुआ और हर जुबान पर एक ही सवाल- क्या वाकई अजित दादा अब नहीं रहे?

सुबह होते ही काटेवाड़ी और आसपास के गांवों से लोग पैदल, बाइक और बसों में सवार होकर अजित पवार के घर की ओर निकल पड़े. घर के बाहर लंबी कतारें लग गईं. लोग हाथ जोड़कर, आंखों में आंसू लिए अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहे थे. भीड़ के बीच-बीच में नारे गूंज उठते- अजित दादा अमर रहें, अजित दादा परत या… इन नारों में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि एक अपने को खो देने का दर्द साफ झलक रहा था.

पार्थिव शरीर को बारामती के पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी अस्पताल से लाकर काटेवाड़ी स्थित आवास पर रखा गया था. जैसे ही अंतिम दर्शन के लिए द्वार खुले, लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा. बुजुर्ग महिलाएं रोते हुए जमीन पर बैठ गईं, युवाओं की आंखों से आंसू थे. कई लोग तो बस चुपचाप खड़े थे, जैसे शब्द ही खत्म हो गए हों.

कई ग्रामीणों ने कहा कि अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि परिवार के सदस्य जैसे थे. गांव की बेटी को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलवाने से लेकर किसान की फसल खराब होने पर मदद करने तक दादा हमेशा साथ खड़े रहते थे. यही वजह है कि आज उनका जाना लोगों को निजी नुकसान जैसा लग रहा है.

धाराशिव जिले के तेर गांव से आए चंद्रकांत माली ने कहा कि महाराष्ट्र ने आज हीरा खो दिया है. ऐसे नेता बार-बार पैदा नहीं होते. उन्होंने कहा कि अजित पवार ने पूरे क्षेत्र के विकास के लिए काम किया… बेहतर सड़कें, स्कूल, सिंचाई परियोजनाएं सब उनकी दूरदर्शिता का नतीजा हैं.