कच्चा तेल हुआ सस्ता, क्या अब कम हो जाएंगी पेट्रोल की कीमतें? पेट्रोलियम मंत्री ने दिया जवाब
नई दिल्ली. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की वजह से पिछले कुछ समय में दुनिया भर में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में भारी उछाल आया है. इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ा और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ गईं. हालांकि, भारत में दाम उतने नहीं बढ़े जितने दुनिया के बाकी देशों में देखने को मिले. अब जब कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी कम होने लगी हैं, तो आम लोगों के मन में एक ही सवाल है कि क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा? केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस पर स्थिति साफ करते हुए कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार कम बनी रहती हैं, तो आगे इस पर फैसला लिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि क्रूड की खरीदारी 2 महीने में एडवांस में की जाती है. यानी अभी के क्रूड के लिए 2 महीने पहले ही ऑर्डर दिया जा चुका है. पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत ने देश में ईंधन की सप्लाई को रुकने नहीं दिया. उन्होंने कहा कि सही रणनीति और सूझबूझ के कारण भारत के पास हमेशा कच्चे तेल, डीजल और एलपीजी (LPG) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद रहा.
कंपनियों का भारी नुकसान: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने की वजह से देश की सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. 30 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बेचने वाली कंपनियों को कुल 74,781 करोड़ रुपये का संचित घाटा (Accumulated Loss) हुआ है.
अंडर-रिकवरी का बोझ: अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान तेल कंपनियों की कुल अंडर-रिकवरी (लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचना) 1.88 लाख करोड़ रुपये रही. इसमें पिछले साल के एलपीजी के घाटे को भी जोड़ दें तो कंपनियों का कुल नुकसान 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है.
पुराने महंगे स्टॉक से हो रही है अभी सप्लाई
जब हरदीप सिंह पुरी से पूछा गया कि खुदरा बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम कब कम होंगे, तो उन्होंने इसके पीछे की तकनीकी वजह बताई. उन्होंने कहा कि अभी देश की रिफाइनरियों में जिस कच्चे तेल को प्रोसेस किया जा रहा है, वह दो महीने पहले बुक किया गया था. उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें और जहाजों का भाड़ा बहुत ज्यादा था. इसलिए अभी महंगा तेल बाजार में आ रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ग्लोबल मार्केट में आगे भी कम बनी रहीं, तो आने वाले समय में राहत देखी जा सकती है.
वैश्विक उथल-पुथल से बचने के लिए भारत ने तेल आयात के अपने तरीकों में बड़ा बदलाव किया है. मंत्री ने बताया कि भारत अब उन देशों से भी तेल और एलपीजी (LPG) के कार्गो मंगवा रहा है जिनसे पहले कभी व्यापार नहीं होता था, जैसे कि अमेरिका. इसके अलावा, भारतीय रिफाइनरियां हर तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. यही वजह है कि जब वेनेजुएला से रास्ते खुले, तो भारत ने वहां से भी तेल खरीदना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि वे कीमतों के बढ़ने से चिंतित नहीं हैं, बल्कि भविष्य के लिए अपनी स्टोरेज क्षमता और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहे हैं.
ग्लोबल मार्केट पर बात करते हुए पेट्रोलियम मंत्री ने एक बेहद दिलचस्प आंकड़ा साझा किया. उन्होंने बताया कि अमेरिका में पिछले 50 सालों से कोई नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी नहीं बनी है. वहीं यूरोप भी हर दिन 2 लाख बैरल की दर से अपनी रिफाइनिंग क्षमता खो रहा है. इसके उलट, साल 2030 तक दुनिया में केवल तीन या चार बड़े रिफाइनिंग हब बचेंगे और भारत बहुत तेजी से दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रिफाइनिंग हब के रूप में उभर रहा है. आने वाले समय में दुनिया का हाइड्रोकार्बन व्यापार उन्हीं देशों के हाथ में होगा जिनके पास बड़ी रिफाइनिंग क्षमता होगी और भारत इसमें सबसे आगे खड़ा है.
