CJP के आंदोलन में दिल्ली जा रहे 8 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का मामलाः हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ‘सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के आंदोलन में शामिल होने जा रहे 8 कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और दो टूक कहा है कि या तो कार्यकर्ताओं को अदालत में पेश किया जाए या फिर तुरंत रिहा किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 12 अक्टूबर को होगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, CJP संगठन के ये कार्यकर्ता पुणे से ट्रेन (गोवा एक्सप्रेस) पर सवार होकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने उन्हें ट्रेन से उतारकर हिरासत में ले लिया था।बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका: इस अवैध हिरासत के खिलाफ कार्यकर्ताओं के परिजनों की ओर से हाईकोर्ट में अलग-अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाएं दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं के वकील मोनीष रघुवंशी ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं को किस आधार और किन कारणों से हिरासत में लिया है, इसकी कोई वैध वजह नहीं बताई गई है, जो कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। अब 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर यह तय होगा कि सरकार इस कार्रवाई पर क्या सफाई देती है और अदालत इस पर क्या अंतिम निर्णय सुनाती है।