डॉक्टरों के मना करने के बावजूद भी परिजन नवजात कंज्वाइंड ट्विंस को ले गये घर फिर…

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बलरामपुर: आपने जुड़वां बच्चों के बारे में तो सुना होगा। लेकिन एक-दूसरे से जुड़े हुए जुड़वां बच्चे यानी कंज्वाइंड ट्विन्स (संयुक्त जुड़वा बच्चे) कम ही देखे होंगे। हो सकता है कि आपने डिस्कवरी चैनल में कई बार शरीर से एक साथ जुड़े हुए जुड़वां बच्चे देखे हो। बहुत कम ही ऐसे बच्चे बच पाते हैं। उन्हें जीवित रखने को डॉक्टरों के सुपरविज़न की जरूरत होती है। ऐसा ही एक प्रसव बलरामपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सनावल में हुआ, जहां प्रसव के बाद जन्में कंज्वाइंड ट्विंस को परिजन डॉक्टरों के मना करने के बावजूद भी घर ले गए। लेकिन घर जाने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। इन्हें देखकर मन में ये सवाल आना लाजमी है कि क्या जुड़े हुए जुड़वां बच्चे ज्यादा दिनों तक जिंदा रहते हैं? क्या किसी कारण से इनकी मौत गर्भ में ही हो जाती है या फिर पैदा होने के बाद ये मर जाते हैं? ऐसे बच्चों के लिए जीवन जीना कठिन हो जाता है।पैदा होने के बाद जो बच्चे जीवित रह जाते हैं, उनके माता-पिता ये सोचकर खुश रहते हैं कि उनके बच्चे उनकी आंखों के सामने हैं। आज के समय में टेक्नोलॉजी ने कई बड़े काम कर दिखाएं हैं। कंज्वाइंड ट्विन्स के भी सफल ऑपरेशन हो चुके हैं। कई बार ऑपरेशन सफल नहीं भी हो पाते हैं। ये बात बहुत अहम होती है कि बच्चे के शरीर के किस हिस्से से दूसरे बच्चे का शरीर जुड़ा हुआ है।

फोर्टिस हॉस्पिटल कोलकाता की बाल रोग विशेषज्ञ और नियोनेटोलॉजिस्ट सुमिता साह के अनुसार कंज्वाइंड ट्विन्स में अगर किसी भी बच्चे की मौत प्रेग्नेंसी के दौरान हो जाती हैं तो दूसरे बच्चे के जीवित रहने की संभावना बहुत कम होती है। मरा हुआ बच्चा पैरासाइड की तरह दूसरे बच्चे के साथ में जुड़ा हुआ होता है। अगर पैदा होने के बाद एक बच्चा जीवित भी है तो बहुत कम संभावना रहती है कि वो ज्यादा दिनों तक बच पाए।जुड़े हुए बच्चों का जन्म प्रारंभिक भ्रूण के दो भागों में बटने से होता है। एम्ब्रियो आंशिक रूप से दो भागों में बट जाता है और इससे दो भ्रूण विकसित हो जाते हैं। ये शारीरिक रूप से जुड़े हुए रहते हैं। ज्यादातर मामलों में सीने, पेट, सिर या फिर श्रोणी से जुड़े हुए बच्चों का जन्म होता है। जन्म के बाद कई जुड़े हुए जुड़वां बच्चे जीवित नहीं रहते हैं। सर्जरी और एडवांस टेक्नोलॉजी की मदद से जुड़े हुए जुड़वां बच्चों के सर्वाइवल रेट में बढ़त हुई है। कुछ बच्चों को सर्जरी के माध्यम से अलग किया जा चुका है। मेडिकल डेली रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक दो लाख बर्थ में से एक कंज्वाइंड ट्विन्सया संयुक्त जुड़वा बच्चे जन्म लेता है, जिसका प्रतिशत 0 ।000005% है। उनमें से 40 से 60 प्रतिशत स्टिलबोर्न होते हैं जबकि 35 % बच्चे जन्म के तुरंत बाद ही मर गए। आज के समय में पूरी दुनिया में केवल 12 सेट कंज्वाइंड ट्विन्स ही हैं। 1950 के दौरान डॉक्टर 75 प्रतिशत मामलों में केवल एक कंज्वाइंड ट्विन्स को बचाने में सक्षम हो पाए।