रायपुर में देवकीनंदन ठाकुर का बयान – ‘PM मोदी मौन है तो होने वाला है कुछ बड़ा’

रायपुर. प्रेस क्लब में आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन धर्म, राम मंदिर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी, कथाकार-कलाकार-पत्रकार की भूमिका, सनातन बोर्ड के गठन, धर्मांतरण, जैसे कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के कथित चोरी मामले पर मौन हैं, तो संभव है कि वे किसी बड़े कदम की तैयारी कर रहे हों. इसके साथ ही उन्होंने समाज को सही दिशा देने में कथाकार, पत्रकार और कलाकार की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण बताई.

राम मंदिर में कथित चोरी के मामले को लेकर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल पूछा गया तो देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत मत है कि यदि प्रधानमंत्री मौन हैं, तो संभव है कि वे किसी बड़े निर्णय की तैयारी कर रहे हों. उन्होंने कहा, “मोदी जी मौन हैं तो कुछ बड़ा करने वाले हैं, ऐसा मेरा मानना है.” उनके इस बयान की को लेकर अब कई तरह की चर्चा हो रही है.

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यदि समाज को सही दिशा में ले जाना है तो कम से कम तीन वर्गों को अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभानी होगी. उन्होंने कहा कि सबसे पहले कथाकार, फिर कलाकार और उसके बाद पत्रकार समाज को दिशा देने वाले सबसे प्रभावशाली वर्ग हैं. उन्होंने इसे ‘सत्यम, शिवम, सुंदरम’ से जोड़ते हुए कहा कि पत्रकार सत्य लिखे, कथाकार सत्य बोले और कलाकार वही दिखाए जो सत्य और समाज के हित में हो. यदि ये तीनों अपनी जिम्मेदारी निभाएं तो न केवल युवाओं का बल्कि पूरे देश का भविष्य सुरक्षित होगा.

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आज दुर्भाग्य यह है कि लोग सच बोलने, सच लिखने और सच दिखाने के बजाय केवल अपनी व्यवस्था और अपने हितों को सुरक्षित रखने में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि इसी कारण समाज का वातावरण बदल रहा है और युवा गलत दिशा की ओर बढ़ रहे हैं. उनका मानना है कि यदि समाज के प्रभावशाली वर्ग सत्य के साथ खड़े होंगे, तभी समाज का उत्थान संभव है.

युवाओं को लेकर चिंता जताते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आज का युवा भटकाव की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही धार्मिक ग्रंथों और भारतीय संस्कृति का ज्ञान दिया जाना चाहिए. उनका मानना है कि जिस दिन भारत का युवा भगवद्गीता पढ़ना शुरू कर देगा, उसी दिन सनातन धर्म फिर से मजबूत और युवा बन जाएगा. देवकीनंदन ठाकुर ने मंदिरों के बेहतर प्रबंधन के लिए सनातन बोर्ड बनाने की मांग रखी. उन्होंने कहा कि मंदिरों की संपत्ति और संसाधनों का सही उपयोग गुरुकुलों, गौशालाओं और धार्मिक शिक्षा के विकास में होना चाहिए. उनका कहना था कि यदि मंदिरों की व्यवस्था व्यवस्थित होगी तो आने वाली पीढ़ियां संस्कारवान और सुरक्षित बनेंगी.

उन्होंने कहा कि सरकारें मदरसों को आर्थिक सहायता देती हैं, लेकिन गुरुकुलों और मंदिरों को पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता. उनका कहना था कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक शिक्षा को संरक्षित करने के लिए गुरुकुलों को भी समान महत्व और आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए.

धर्मांतरण के मुद्दे पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि सच्चा धर्म कभी अपनी संख्या बढ़ाने के लिए कार्य नहीं करता. उन्होंने दावा किया कि हिंदू समाज कभी किसी को अपने धर्म में जोड़ने नहीं गया, जबकि अन्य माध्यमों से धर्मांतरण के प्रयास किए जाते हैं. उन्होंने भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं को सृष्टि का रचयिता बताते हैं और सनातन धर्म मानवता के लिए मार्गदर्शक है.

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आज भी देश में गौमाता सड़कों पर घूमती दिखाई देती हैं, जो चिंता का विषय है. उन्होंने गौ संरक्षण के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है.

उन्होंने कहा कि गरीब व्यक्ति निजी अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं करा सकता. इसलिए आम लोगों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने की जरूरत है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े.