‘बंद करो, बंद करो…’, केदारनाथ में VIP दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं का फूटा गुस्सा

केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. शुक्रवार को जहां तीर्थ पुरोहितों ने वीआईपी दर्शन व्यवस्था के विरोध में आवाज उठाई थी, वहीं शनिवार को आम तीर्थ यात्रियों का गुस्सा भी खुलकर सामने आ गया. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर के बाहर एकत्र होकर वीआईपी दर्शन बंद करने की मांग को लेकर नारेबाज़ी की. बता दें कि इन दिनों केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. जिसके चलते आम भक्तों को कई घंटों तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है. इसके विपरीत, वीआईपी व्यवस्था के तहत कुछ लोगों को प्राथमिकता के आधार पर जल्दी दर्शन कराए जा रहे हैं. इसी असमानता को लेकर अब विरोध तेज हो गया है.

तीर्थ यात्रियों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा कई बार वीआईपी दर्शन को सीमित या बंद करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है. श्रद्धालुओं का कहना है कि जब वे घंटों लाइन में खड़े रहते हैं और उसी दौरान कुछ लोगों को सीधे अंदर भेज दिया जाता है, तो इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं.

इससे पहले बद्री-केदार मंदिर समिति के खिलाफ तीर्थ पुरोहितों ने भी विरोध प्रदर्शन किया था. पुरोहितों का कहना था कि वीआईपी दर्शन की व्यवस्था से पारंपरिक पूजा व्यवस्था प्रभावित हो रही है और आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव हो रहा है. अब जब तीर्थ यात्री भी इस मुद्दे पर सड़कों पर उतर आए हैं, तो मामला और गंभीर हो गया है.
प्रदर्शन कर रहे श्रद्धालुओं ने साफ कहा कि भगवान के दरबार में सभी बराबर हैं और यहां किसी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि या तो वीआईपी दर्शन पूरी तरह बंद किए जाएं या फिर ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए जिससे किसी के साथ भेदभाव न हो.

प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि वह भारी भीड़ को कैसे नियंत्रित करे. अधिकारियों का तर्क है कि वीआईपी पास व्यवस्था कुछ विशेष परिस्थितियों और प्रबंधन के लिहाज से बनाई जाती है. हालांकि मौजूदा हालात में इस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

अब देखना होगा कि बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन क्या कदम उठाता है. यदि जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह विवाद और अधिक बढ़ सकता है और यात्रा व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है.