डायनासोर के बाद धरती पर था इस विशालकाय जीव का राज, मचाया था खूब आतंक
धरती पर सांपों की ऐसी कई प्रजाति हैं, जिन्हें देखने के बाद किसी के भी पैरों से जमीन खिसक जाए. खासकर जहरीले सांप जिसके डसने के बाद इंसान का जिंदा रहना मुश्किल होता है. अब वैज्ञानिकों के हाथ एक ऐसे सांप के जीवाश्म लगे हैं, जिससे यह पता चलता है कि पर्यावरणीय तापमान से जीव-जंतु कितना बड़ा आकार ले सकते हैं. वैज्ञानिकों को इस सांप के जीवाश्म कोलंबिया की एक खदान से मिले हैं. इस खोज से पता चलता है कि यह विशाल सांप बेहद गर्म और कम नमी वाले जंगलों में वास करता था. वैज्ञानिकों ने इस खोज के आधार पर अनुमान लगाया है कि उस वक्त धरती का तापमान आज के तापमान से भी ज्यादा रहा होगा.
साल 2009 में कोलंबिया के सेरेहोन कोयला खदान में वैज्ञानिकों को खुदाई के दौरान एक विशाल वर्टिब्रा (Vertebrae) मिला था. वैज्ञानिक पहले इसे किसी विशाल मगरमच्छ मान रहे थे, लेकिन जब इसकी डीप स्टडी की तो उसमें पता चला कि यह तो सांप की हड्डी है. सांप की यह हड्डी इतनी बड़ी थी कि किसी भी प्रजाति से मेल नहीं खा रही थी. इसी खुदाई के दौरान उन्हें 28 अलग-अलग जीवाश्म मिले और फिर जब इन सभी जीवाश्म को जोड़ा गया तो चौंकाने वाला आकार सामाने आया है, क्योंकि यह एक विशालकाय सांप की हड्डियों का ढांचा था, जिसकी लंबाई 42 फीट और वजन 1,113 किलो था, जो आज के एनाकोंडा की हड्डियो से लगभग दोगुना मोटा था.

उस वक्त में सांप के लिए खुद के शरीर को गर्म रखना इतना आसान नहीं था और उनके शरीर का आकार तापमान पर निर्भर करता था. इसका सीधा सा मतलब है कि जितना ज्यादा तापमान होगा, उतना ही लंबा सांप होगा. टाइटन बोआ के आकार से पता चलता है कि उस वक्त धरती का टेंपरेचर बहुत ज्यादा रहा होगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि उस वक्त कोलंबिया में एवरेज टेंपरेचर 30-34 डिग्री सेल्सियस रहा था, जो कि आज की गर्म ट्रॉपिकल जगहों से भी ज्यादा गर्म है. कहा जा सकता है कि टाइटन बोआ उस समय धरती के तापमान को जानने के लिए किसी जिंदा थर्मामीटर की भूमिका में होगा.
खोज में कहा गया है कि टाइटन बोआ (Titanoboa) का जब धरती पर वास था, तो उस वक्त स्तनधारी जीव-जंतु छोटे थे. ज्यादातर चूहे जैसे जीव, जिनका वजन मुश्किल से 2 से 5 किलो तक रहा होगा. ऐसे में टाइटन बोआ (Titanoboa) के शिकार 5 फीट चौड़ी खोल वाले कछुए और 20 फीट लंबे मगरमच्छ जैसे जीव थे. टाइटन बोआ (Titanoboa) के बारे में बताया गया है कि वह नदी और दलदलों में छिपकर वार करने में बहुत माहिर थे, क्योंकि बड़ा शरीर होने के चलते अचानक हमला करने उनके लिए मुश्किल था, लेकिन कभी-कभी अपने विशालकाय शरीर से शिकार को कुचल भी दिया करते थे. यह शिकार पर 400 पीसाई से भी ज्यादा का दबाव डाल सकते थे. इस दबाव से बड़े से बड़ा जानवर भी एक बार में दम तोड़ दे.
