राम मंदिर से दो Kg की सोने की गदा और करोड़ों के गहने गायब होने का भी दावा, ड्राइवर राम शंकर पर गंभीर आरोप
अयोध्या: राम मंदिर के चढ़ावे की राशि में करोड़ों की कथित चोरी की जांच सोमवार से शुरू हुई। एसआईटी जांच के दायरे में वे लोग है जिन पर चढ़ाचा राशि गायब करने और साक्ष्य मिटाने के आरोप लगे हैं। आरोप मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के चहेतों पर भी लग रहे हैं, जिनकी माली हालत अचानक कई गुना बढ़ गई है। यह सब एसआईटी की जांच के दायरे में होगा। वहीं, जिम्मेदार पदाधिकारियों से गहराई से पूछताछ हो सकती है। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद ने पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चढ़ावे की राशि के जेवरात भी गायब हैं। इसमें करोड़ों रुपये का सोना-चांदी शामिल है। दो किलो की सोने की गदा गायब होने की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों में कितनी सच्चाई है, इस बारे में कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि बैंक ने जिस एजेंसी के कर्मचारियों को लगाया है, उन्हीं ने चोरी की हैं। ट्रस्ट की निगरानी टीम की लापरवाही भी सामने आ रही है। हालांकि उन पर चोरी का आरोप नहीं है। ऐसे में काउंटिंग टीम में लगे कर्मचारियों से पूछताछ हो सकती है। चढ़ावा राशि की गिनती में करीच 44 कर्मचारी लगे हैं। इनमें से 40 बैंक व उसकी एजेंसी के हैं, जबकि 4-5 लोग मंदिर ट्रस्ट की तरफ से नजर रखने के लिए तैनात हैं। टीम दो शिफ्टों में 8 सीसीटीवी कैमरों और 2 सुरक्षा गार्ड की निगरानी में मशीनों से गिनती होती है। मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्त ने बताया कि 10-10 गड्डियों के बंडल बना कर बॉक्स में रखकर सील करके बैंक भेजा जाता है। ऐसे सभी कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी। बाबरी केस के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
सबसे गंभीर आरोप ट्रस्ट के महसचिव चंपत राय के चहेते पूर्व ड्राइवर राम शंकर यादव पर लगे है। बताया जा रहा है कि राय ने मंदिर व्यवस्था को लेकर उसे खास छूट दे रखी थी। बाहर से आने वाले करोड़पति श्रद्धालुओं से उसने सीधे सपर्क बना रखे है। इतना ही नहीं, अपने खास लोगों को नौकरी दिलवाई और काउंटिंग टीम में जगह दिलवाई। उसकी आर्थिक स्थिति करोड़ों में पहुंच गई। वहीं, टिन्नू पर आठ माह के सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने का आरोप है। एसआईटी इस बात की में पड़ताल करेगी कि मंदिर की व्यवस्था में लगे कर्मचारियों ने कैसे कमाई की। मंदिर कर्मचारी लवकुश के आवास से 20 लाख रुपये मिले थे। एक अन्य कर्मचारी अनुकल्प के घर से रुपये मिलने की बात कही जा रही है।
मंदिर ट्रस्ट के जिम्मेदार भी जांच टीम के शक के दायरे में है। वैसे तो मंदिर ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य है, पर वे यहा रहते नहीं और न उनका कोई दखल है। वित्तीय संचालन का अधिकार केवल महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के पास है जिनके संयुक्त हस्ताक्षर से ही भुगतान होता है। चंपत राय आरएसएस के प्रचारक है और विहिप के पदाधिकारी भी है। वहीं अनिल मिश्र भी आरएसएस के पूर्व पदाधिकारी है। वहीं, दक्षिण से आए गोपाल राव को सघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल का करीबी माना जाता है। वे मंदिर व्यवस्था के प्रभारी है। आरोप है कि गोपाल के चहेतों ने भी दर्शन पस के नाम पर खूब कमाई की। चर्चा है कि इसी सबके चलते विहिप और संघ ने चुप्पी साध रखी है।
