धरती चुपचाप सूख रही… हर साल 28 करोड़ लोगों का पानी गायब, समंदर निगल रहा मीठा जल

धरती के बड़े हिस्से तेजी से सूखते जा रहे हैं. इसे वैज्ञानिक भाषा में कॉन्टिनेंटल ड्राइंग कहा जाता है. महाद्वीपों पर मीठे पानी की लगातार कमी होता जा रही है. यह समस्या अब सिर्फ किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक महाद्वीपों से पानी खत्म होने के कई कारण हैं. बर्फ और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. जमी हुई जमीन यानी परमाफ्रास्ट टूट रही है. गर्मी बढ़ने से पानी ज्यादा उड़ रहा है. साथ ही सबसे बड़ा कारण है जमीन के नीचे के पानी का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है. इस रिपोर्ट में ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ के पिघलने को शामिल नहीं किया गया है. अब महाद्वीप बर्फ की चादरों से भी ज्यादा समुद्र का स्तर बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं. हर साल करीब 11.4 ट्रिलियन क्यूबिक फीट पानी जमीन से निकलकर समुद्र में जा रहा है. यह मात्रा इतनी है कि इससे 28 करोड़ लोगों की सालभर की जरूरत पूरी हो सकती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक हर सेकंड चार ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल जितना पानी समुद्र में पहुंच रहा है.

यह रिपोर्ट 4 नवंबर को वर्ल्ड बैंक ने जारी की है. इसमें नासा के GRACE मिशन के 22 साल के आंकड़े शामिल हैं जो धरती के गुरुत्वाकर्षण में होने वाले छोटे बदलावों से पानी की हलचल को मापता है. इसके साथ ही 20 साल के आर्थिक और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल किया गया है. रिपोर्ट बताती है कि हर साल औसतन 3 फीसदी बारिश से मिलने वाला पानी महाद्वीपों से खत्म होता जा रहा है. सूखे और अर्ध-सूखे इलाकों में यह आंकड़ा 10 फीसदी तक पहुंच जाता है. दक्षिण एशिया जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. हालात और बिगड़ रहे हैं. अलग-अलग सूखे इलाके अब मिलकर बड़े मेगा ड्राइंग क्षेत्रों में बदलते जा रहे हैं. इसका सीधा असर खेती और रोजगार पर पड़ रहा है. सब-सहारा अफ्रीका में सूखे की वजह से हर साल 6 से 9 लाख नौकरियां तक खत्म हो जा रही हैं. सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और जमीन के बिना खेती करने वाले लोगों को होता है. पानी की कमी से जंगलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ रहा है. दुनिया के 36 जैव विविधता वाले इलाकों में से कम से कम 17 जगहों पर मीठा पानी घट रहा है. आग का खतरा बढ़ चुका है. इसमें मेडागास्कर, दक्षिण-पूर्व एशिया और ब्राजील के कुछ हिस्से शामिल हैं. जमीन के नीचे से पानी निकालना सबसे बड़ा कारण है. ज्यादातर देशों में भूजल की सही निगरानी नहीं है, इसलिए सालों से इसका बेतहाशा इस्तेमाल हो रहा है. जलवायु बदलाव के चलते जैसे-जैसे दुनिया गर्म और सूखी होगी, जमीन के नीचे के पानी पर दबाव और बढ़ेगा. रिपोर्ट के अनुसार, खेती दुनिया के कुल पानी इस्तेमाल का 98 फीसदी हिस्सा लेती है.

अगर खेती में पानी का सही इस्तेमाल किया जाए तो बहुत सारा पानी बचाया जा सकता है. अगर गेहूं और चावल जैसी 35 अहम फसलों में पानी की खपत को औसत स्तर तक लाया जाए तो 11.8 करोड़ लोगों की जरूरत जितना पानी बचाया ज सकता है. बता दें कि जिन देशों में पानी का सही प्रबंधन है, वहां मीठा पानी दो से तीन गुना धीमी रफ्तार से खत्म हो रहा है. जबकि खराब प्रबंधन वाले देशों में हालात ज्यादा खराब हैं.

दुनिया स्तर पर वर्चुअल वाटर ट्रेड भी एक बड़ा समाधान हो सकता है. इसका मतलब है कि देश पानी से जुड़ी चीजें जैसे अनाज या दूसरी फसलें आयात-निर्यात के जरिए एक-दूसरे से पानी का बोझ बांटते हैं. साल 2000 से 2019 के बीच दुनिया में पानी का इस्तेमाल 25 फीसदी बढ़ा है. इसमें से एक-तिहाई बढ़ोतरी उन इलाकों में हुई जो पहले से सूख रहे थे. कई देशों ने ज्यादा पानी वाली फसलों की खेती बढ़ा दी है. बता दें कि सही तरीके से किया गया वर्चुअल वाटर ट्रेड बहुत पानी बचा सकता है.