पानी के ऊपर बसा है पूरा गांव, कहलाता है धरती का स्वर्ग, नजारे देख झूम उठेगा मन

गांव का नाम सुनते ही हम सबके मन में हरियाली, खेत-खलिहान, मवेशी-ट्रैक्टर याद आने लगते हैं. पिछले कुछ वर्षों में गांवों की तस्वीर बदली है. भारत में कुछ गांव तो ऐसे भी हैं जो किसी इतने खूबूसरत हैं कि स्वर्ग जैसे दिखते हैं. देश में एक गांव ऐसा भी है जो पूरा का पूरा पानी के ऊपर बसा हुआ है. मानसून के सीजन में इस गांव का नजारा स्वर्ग जैसा होता है. दुनिया के सबसे खूबसूरत गांवों में इसकी गिनती है. दुनियाभर से लोग इस गांव की एक झलक पाने के लिए आते हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि पानी के ऊपर बसे इस गांव में पक्की सड़कें हैं, यहां पर बसें भी चलती हैं. गांव किस राज्य में है, यहां पर कैसे जा सकते हैं, आइये जानते हैं सबकुछ……

गांव की प्राकृतिक खूबसूरती सबका मन मोह लेती है. शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से जब मन ऊब जात है तो लोग प्रकृति के गोद में बसे गांव घूमने जाते हैं. गांवों का प्राकृतिक-स्वच्छ वातावरण मन को आत्मिक शांति देता है. भारत में कई खूबसूरत गांव हैं. कुछ पहाड़ों की गोद में तो कुछ नदी-झील किनारे बसे हैं. कुछ मैदानी इलाकों में तो कुछ रेगिस्तानी इलाकों में. एक गांव ऐसा भी है जो पानी के ऊपर बसा हुआ है. गांव में पक्की सड़कें हैं, आधुनिक सुविधाएं हैं. इस गांव का नाम है कडमकुडी (Kadamakkudy). केरल में आता है. आइये जानते हैं इस गांव का खासियत.

केरल का छोटा सा गांव कडमकुडी पानी के ऊपर बसा हुआ है. इसे देखकर लगता है कि जैसे यह किसी और दुनिया का गांव हो. गांव की खूबसूरती मंत्रमुग्ध कर देती है. मानसून में यहां का नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं होता, यही वजह है कि इस गांव को लोग प्यार से ‘छोटा स्वर्ग’ भी कहते हैं. यह गांव कोच्चि से सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी पर है. एर्नाकुलम जिले में आता है. यह गांव कोच्चि के पास स्थित 14 छोटे-छोटे द्वीपों का एक सुंदर समूह है.

कडमकुडी (कडमाकुडी) को ‘धरती का सबसे खूबसूरत गांव’ कहे जाने की कई वजहे हैं. गांव का नजारा पेंटिंग जैसे लगता है. चारों तरफ शांत बैकवॉटर, धीरे-धीरे चलती छोटी नावें, हर तरफ घनी हरियाली, नारियल के पेड़, खुला आसमान और ताजा हवा के झोकें आपको ऐसी दुनिया का अहसास कराते हैं जिसकी कल्पना मन-मस्तिष्क में चलती रहती है.

गांव की साफ-सफाई और शांति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां प्रकृति की असली आवाजें सुनाई देती हैं. अगर आप एर्नाकुलम जंक्शन से कडमकुडी (कडमाकुडी) गांव जाना चाहते हैं तो सबसे पहले स्टेशन से बाहर निकलकर बस स्टैंड जाएं. वहां से कोथड़ा या वारापुजा या चेरूलूर रूट की बस पकड़ लें. कोथड़ा से कदामक्कुडी गांव के लिए ऑटो मिलते हैं जो 5-10 मिनट में पहुंचा देंगे.

गांव में पहुंचते ही पिझाला ब्रिज मिलेगा. यह पिझाला द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ता है. कडमक्कुडी द्वीप को दोनों तरफ जोड़ता है. आसपास के बैकवाटर और मैंग्रोव का शानदार व्यू दिखाता है. इसका निर्माण 2020 में हुआ था. यह पहला सड़क मार्ग पुल है. इससे पहले लोग नाव से आते-जाते थे.

मैंग्रोव केरल के बैकवॉटर की सबसे बड़ी ताकत हैं. ये मिट्टी के कटाव को रोकते हैं. समुद्री लहरों से तटों की रक्षा करते हैं. हजारों पक्षियों-जंगली जंतुओं को प्राकृतिक आवास देते हैं. यहां छह महीने प्रॉन्स फार्मिंग तो छह महीने खेती होती है. यहां पर सनसेट का नजारा अलग अनुभूति देता है. अगर जीवन की भागदौड़ से ब्रेक लेना हो, शांति की तलाश हो तो एक बार कडमाकुडी गांव जरूर घूम आइये. देश के लगभग सभी बड़े रेलवे स्टेशन से एर्नाकुल जंक्शन के लिए ट्रेनें मिलती हैं. कोच्चि यहां का नजदीकी एयरपोर्ट है.