धरती के बंजर जमीन पर मौजूद है ‘विशाल आंख’, रेगिस्तान के बीच आसमान की तरफ देखती है

ब्रह्मांड की गहराइयों से जब धरती की तरफ देखा जाता है, तो सहारा के रेगिसतान के बीचों-बीच एक ऐसी आकृति दिखाई देती है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हो जाते हैं. इसे दुनिया आई ऑफ द सहारा या रिचट स्ट्रक्चर के नाम से जानती है. लगभग 40 किलोमीटर के व्यास में फैली यह विशालकाय नीली आंख जैसी आकृति इतनी साफ दिखाई देती है कि अंतरिक्ष यात्री दशकों से इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष में अपने लैंडमार्क के रूप में करते आए हैं. अंतरिक्ष से देखने पर यह बिल्कुल किसी विशालकाय इंसानी आंख की तरह दिखाई देती है, यह अफ्रीका के मॉरिटानिया देश में स्थित है.कई सालों तक वैज्ञानिक यह मानते थे कि रेगिस्तान में यह आकृति किसी विशाल उल्कापिंड के टकराने के कारण बनी है. इसकी बनावट इतनी सटीक है कि इसे प्राकृतिक मानना मुश्किल लगता है. लेकिन नासा और और भू-वैज्ञानिकों ने अब इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज कर दिया है. रिसर्च में यहां किसी भी तरह के झटके या बाहरी मलबे के कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो किसी भी उल्कापिंड के टकराने के बाद मिलते हैं.

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कोई आसमानी हमला नहीं बल्कि धरती के भीतर होने वाली हलचल के कारण बनी आकृती है. यह एक डोम यानी गुंबद की तरह है. लाखों साल पहले जमीन के नीचे से चट्टानों की परतें ऊपर उठीं, जिससे एक गुंबद जैसा ढांचा बना. जिसको सयम के साथ हवा और बारिश ने धीरे-धीरे ऊपरी चट्टानों को काटना शुरू किया. जो चट्टानें नरम थीं, वे जल्दी घिस गईं और जो सख्त थीं, वे मजबूत बनी रहीं. इसी डिफरेंशियल इरोजन यानी अलग-अलग रफ्तार से होने वाला कटाव के कारण से वहां गोल घेरा बन गया. केंद्र में पुरानी चट्टानें हैं और बाहर की तरफ नई, जो मिलकर एक आंख जैसी आकृति बनाती हैं.

सहारा रेगिस्तान अंतरिक्ष से देखने पर काफी सपाट दिखाई देता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी दिशा समझने में परेशानी होती है. ऐसे में यह आंख की आकृति उनके लिए एक लैंडमार्क का काम करती है. नासा के अनुसार, शुरुआती अंतरिक्ष मिशनों से ही अंतरिक्ष यात्री इसका इस्तेमाल नेविगेशन के लिए करते आ रहे हैं.

नासा की स्टडी में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. सहारा सिर्फ एक बंजर रेगिस्तान नहीं है, बल्कि यह दुनिया के इकोसिस्टम का एक जरूरी हिस्सा है. हर साल यहां से लगभग 18 करोड़ टन धूल उड़ती है. इसमें से करोड़ों टन धूल अमेजन के जंगलों में जाती है, जो वहां के पौधों के लिए फास्फोरस जैसे जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने का काम करती है.