दिल्ली-यूपी में फैला नकली दवाइयों का बड़ा सिंडिकेट ध्वस्त, 6 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने नकली दवाइयों के एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. इस दौरान पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के डीसीपी आदित्य गौतम ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह गिरोह दिल्ली व उत्तर प्रदेश से संचालित हो रहा था और पिछले कई वर्षों से नकली दवाइयों का निर्माण व सप्लाई कर रहा था. डीसीपी के मुताबिक, पुलिस को इस रैकेट के बारे में गुप्त सूचना मिली, जिसके बाद टीम ने कार्रवाई शुरू की. 11 मार्च को शाहदरा में छापेमारी कर पुलिस ने निखिल अरोड़ा नामक आरोपी को गिरफ्तार किया. उसके पास से 20 हजार से अधिक नकली दवाइयां बरामद हुईं, जिनमें मुख्य रूप से दर्द निवारक व एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएं शामिल थी. ये दवाइयां डायबिटीज, हाइपरटेंशन व लीवर से जुड़ी बीमारियों के नाम पर बेची जा रही थी.

पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आगे कार्रवाई करते हुए निखिल के साथियों शिवम त्यागी, मयंक अग्रवाल व मोहित शर्मा को भी गिरफ्तार किया. मोहित शर्मा को रुड़की से पकड़ा गया. उसकी निशानदेही पर पुलिस उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर पहुंची, जहां एक बड़ी फैक्ट्री में नकली दवाइयों का निर्माण किया जा रहा था. दिल्ली पुलिस ने इस फैक्ट्री को ध्वस्त किया. वहां से 2 हजार किलो से अधिक कच्चा माल बरामद किया गया.

रविवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर डीसीपी गौतम ने बताया कि फैक्ट्री में दवाइयां बनाने, पैकेजिंग करने व नकली ब्रांडिंग के लिए आधुनिक मशीनें लगी हुई थी, जिन्हें जब्त कर लिया गया है. जांच के दौरान दो अन्य आरोपी शाहरुख व राहुल को भी गिरफ्तार किया गया, जो फर्जी GST बिल बनाकर इस अवैध कारोबार को सहारा दे रहे थे. इस तरह अब तक कुल छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. डीसीपी ने बताया कि यह गिरोह पिछले 14-15 वर्षों से सक्रिय था, जिसकी शुरुआत वर्ष 2011 के आसपास हुई थी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मयंक अग्रवाल के खिलाफ पहले से दो मुकदमे दर्ज हैं. उसकी संलिप्तता 2013 से सामने आती रही है. प्राथमिक जांच में ये भी सामने आया है कि ये नकली दवाइयां दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश व मध्य प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थी. गिरोह का एक संगठित सप्लाई नेटवर्क था, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग के बाद दवाइयां थोक विक्रेताओं व फिर खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से बाजार तक पहुंचती थी.

डीसीपी ने कहा कि फिलहाल दुकानदारों से पूछताछ नहीं की गई है. जांच आगे बढ़ने के साथ सप्लाई चेन में शामिल हर व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने ये भी बताया कि आरोपी बाजार कीमत के मुकाबले 20-25 प्रतिशत कीमत पर दवाइयां बेचते थे. इससे उनका मुनाफा 100 प्रतिशत से अधिक रहता था. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क का खुलासा अभी शुरुआती चरण में है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.