बीकानेर के आसमान पर बाजों का ‘कब्जा’! मिडिल ईस्ट युद्ध का असर

राजस्थान के बीकानेर जिले में रेगिस्तान की धरती पर इस बार एक अनोखा और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिल रहा है, जहां आसमान में मंडराते हजारों परिंदों ने वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स को भी चौंका दिया है, जहां बीकानेर के जोड़बीड़ में पहली बार एक साथ करीब 2200 स्टेपी ईगल यानी बाज ने ठिकाना बनाया है. पिछली बार यहां इनकी संख्या करीब 1200 थी. ऐसे में इस बार यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो गया है. माना जाता है कि ये प्रवासी पक्षी हर साल रूस और मंगोलिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर मिडिल ईस्ट की ओर जाते हैं, लेकिन इस बार इनके रूट और ठहराव में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. एक्सपर्ट्स कयास लगा रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और वहां के अस्थिर हालात इसके पीछे एक वजह हो सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

खास बात यह है कि इन स्टेपी ईगल में करीब 70 प्रतिशत किशोर हैं, जिनकी उम्र दो साल से भी कम बताई जा रही है. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये पक्षी करीब 25 दिन का लंबा प्रवास तय कर भारत पहुंचे हैं और बीकानेर के जोड़बीड़ के साथ-साथ जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में भी बड़ी संख्या में देखे गए हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक ये यहीं रुक सकते हैं. जिससे बीकानेर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने की संभावना है, हालांकि इतनी बड़ी संख्या में इनका आना एक तरह का संकेत भी माना जा रहा है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने और बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. फिलहाल जोड़बीड़ में एक ही पेड़ पर कई-कई बाजों का बैठना प्रकृति के इस दुर्लभ और आकर्षक दृश्य को और भी खास बना रहा है.