भारत वाले ‘गोंडवाना’ महाद्वीप के 80 करोड़ साल पुराने फिंगरप्रिंट मिले
वैज्ञानिकों को प्राचीन भू-भाग गोंडवाना के काफी महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं और उन्होंने पुष्टि की है कि यह एक सुपरकॉन्टिनेंट था। इस खोज से पता चला है कि गोंडवाना बहुत विशाल था और पृथ्वी के कुल भू-भाग का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा इसी का था। यह दक्षिणी गोलार्ध में 800 से 500 मिलियन साल पहले बना था और पृथ्वी पर जटिल जीवन के विकास में इसने अहम भूमिका निभाई थी।
9 सितंबर को ‘साइंस एडवांसेज’ में छपी एक स्टडी में बताया गया है कि गोंडवाना की सीमाओं का पता लगाने के लिए 25,000 से ज्यादा प्राचीन चट्टानों को इकट्ठा किया गया। अब तक यह माना जाता था कि यह पृथ्वी के दो-तिहाई हिस्से में फैला हुआ था लेकिन अब पता चला है कि यह पृथ्वी के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से में फैला था।
रिपोर्ट के मुताबिक कैम्ब्रियन विस्फोट जो लगभग 538 मिलियन साल पहले हुआ था और जिसकी वजह से पृथ्वी पर जटिल जीवन पनपा वह गोंडवाना के बनने की वजह से हुआ था। स्टडी करने वाले लेखकों ने कहा कि इससे पता चलता है कि पृथ्वी के अंदर गहराई में होने वाली जटिल प्रक्रियाओं की वजह से ही आज हमारे आस-पास दिखने वाला ज्यादातर जीवन अस्तित्व में आया है। इससे पहले अरबों सालों तक हमारे ग्रह पर सिर्फ साधारण माइक्रोबियल जीव ही मौजूद थे।
यह खोज ‘डीप-टाइम डिजिटल अर्थ’ नाम के एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हुई। इस ग्रुप ने इस इलाके से हजारों मैग्मैटिक चट्टानें इकट्ठा कीं और उनके बनने की प्रक्रिया को समझने के लिए एक डेटाबेस बनाया। टीम ने यह पता लगाने के लिए AI और दूसरी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया कि ये चट्टानें कब और कहां बनी थीं। इससे उन्हें पृथ्वी पर मौजूद रहे दूसरे महाद्वीपों की संरचना को फिर से समझने में मदद मिली।
वैज्ञानिकों को पता चला है कि करोड़ों सालों की टेक्टोनिक एक्टिविटी की वजह से गोंडवाना के टुकड़े टूटकर पूरी दुनिया में फैल गए थे। समैरियम और नियोडिमियम एलिमेंट के आइसोटोप गोंडवाना के ‘फिंगरप्रिंट’ के तौर पर सामने आए और ये नई चट्टानों के अंदर मिले।
वैज्ञानिक कॉलिन्स ने ‘समैरियम-नियोडिमियम आइसोटोप मैप’ को एक टाइम मशीन कहा जो उन्हें अतीत में ले जाती है। उन्होंने कहा टइनकी खास जगह वाली बनावट हमें 50 करोड़ साल पहले बने एक पुराने महाद्वीपीय भू-भाग को पहचानने में मदद करती है।’ कैम्ब्रियन विस्फोट से पहले पृथ्वी ठंडी थी। जिन जियोलॉजिकल प्रक्रियाओं ने गोंडवाना को आकार दिया उन्हीं से ‘रिंग ऑफ फायर’ भी बनी। इससे वातावरण में भारी मात्रा में ज्वालामुखी गैसें निकलीं जिससे पृथ्वी गर्म हो गई।
